लेखक – डॉ सुहैल उमरी
( इल्क्ट्रो -होम्योपथी चिकित्सक )
आज के समय में खानपान की बदलती आदतों और साफ-सफाई में थोड़ी सी लापरवाही के कारण फूड पॉइज़निंग एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। यह बीमारी तब होती है जब भोजन या पेय पदार्थ रोगाणुओं से दूषित हो जाते हैं। ये रोगाणु, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में रोगजनक कहा जाता है, भोजन को असुरक्षित बना देते हैं और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
आमतौर पर बैक्टीरिया और वायरस हर वातावरण में मौजूद होते हैं, लेकिन जब उनकी मात्रा अधिक हो जाती है या भोजन खराब हो जाता है, तो वही भोजन शरीर के लिए विषैला बन जाता है। इसके सेवन से व्यक्ति को फूड पॉइज़निंग हो सकती है।
लक्षण जो अचानक दिखते हैं
फूड पॉइज़निंग के लक्षण अक्सर अचानक प्रकट होते हैं। इनमें उल्टी, मतली, भूख न लगना, कमजोरी, पसीना आना, चक्कर आना, घबराहट, हल्का बुखार, पेट दर्द, दस्त और निर्जलीकरण शामिल हैं। कई बार मरीज को सिरदर्द और अत्यधिक थकान भी महसूस होती है।
यदि स्थिति गंभीर हो जाए तो तीन-चार दिनों से अधिक दस्त रहना, 101 डिग्री से अधिक बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मुंह सूखना, बोलने या देखने में कठिनाई और मूत्र में रक्त जैसे खतरनाक संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
कब दिखाई देते हैं लक्षण
आमतौर पर दूषित भोजन खाने के 2 से 6 घंटे के भीतर इसके लक्षण सामने आ जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह समय कुछ दिनों या हफ्तों तक भी बढ़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा रोगाणु इसके लिए जिम्मेदार है। अधिकतर मामलों में मरीज 48 घंटों के भीतर ठीक हो जाता है।
मुख्य कारण
फूड पॉइज़निंग के प्रमुख कारणों में गंदे बर्तन, बिना धुले फल-सब्जियां, दूषित पानी, अधपका भोजन, विशेषकर मांस और दूध, और खाना बनाते समय हाथों की सफाई का अभाव शामिल हैं। सही तापमान पर भोजन न पकाने से भी बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं और बीमारी का कारण बनते हैं।
किन लोगों को अधिक खतरा
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस बीमारी से अधिक प्रभावित होते हैं। इन लोगों में निर्जलीकरण तेजी से होता है, जो खतरनाक साबित हो सकता है।
बचाव और घरेलू उपाय
यदि बीमारी गंभीर न हो, तो कुछ सावधानियों से इसे घर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नारियल पानी और फलों का रस लेना, अधिक आराम करना और हल्का भोजन जैसे केला, चावल, ओटमील और टोस्ट खाना फायदेमंद होता है।
मसालेदार, तला-भुना और वसायुक्त भोजन से परहेज करना चाहिए। साथ ही कुछ समय के लिए दूध और दही का सेवन बंद रखना बेहतर होता है।
फूड पॉइज़निंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है साफ-सफाई और सुरक्षित भोजन की आदतें अपनाना। थोड़ी सी सावधानी न केवल इस बीमारी से बचा सकती है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

