लेखिका – बेगम तबस्सुम, शिक्षिका एवं सामाजिक चिंतक
“काबिलियत आँखों से नहीं, हौसलों से पहचानी जाती है”—इसी विचार को साकार करती है गोल्डन आई शेफ (Golden Eye Chef), जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए दुनिया की पहली और एकमात्र अंतरराष्ट्रीय कुकिंग प्रतियोगिता है। यह पहल ‘Cooking Beyond Seeing’ यानी देखने से परे खाना पकाने के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह साबित करती है कि असली हुनर देखने का मोहताज नहीं होता।
स्थापना और उद्देश्य
गोल्डन आई शेफ की शुरुआत वर्ष 2019 में अन्तरदृष्टि नामक संस्था द्वारा की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों को एक ऐसा वैश्विक मंच प्रदान करना है, जहाँ वे अपनी पाक-कला का प्रदर्शन कर सकें और समाज में अपनी एक सशक्त पहचान बना सकें। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समावेशिता और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतिभा की नई परिभाषा
समाज अक्सर दृष्टिबाधित व्यक्तियों को सीमाओं के दायरे में देखता है, लेकिन गोल्डन आई शेफ इस सोच को चुनौती देता है। यह मंच दुनिया भर के प्रतिभागियों को यह साबित करने का अवसर देता है कि स्वाद, सुगंध और स्पर्श के सहारे भी उत्कृष्ट व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।
‘Cooking Beyond Seeing’ की प्रेरक अवधारणा
इस प्रतियोगिता का मूल विचार—देखे बिना भी बेहतरीन खाना बनाना—दुनिया को एक नया दृष्टिकोण देता है। प्रतिभागी अपनी अन्य इंद्रियों का उपयोग करते हुए यह दिखाते हैं कि असली हुनर दिल और दिमाग में होता है, आँखों में नहीं।
आत्मनिर्भरता और सम्मान का मंच
गोल्डन आई शेफ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त अभियान है। यह दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आत्मविश्वास देता है और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने का काम करता है।
समाज के लिए एक संदेश
एक सामाजिक चिंतक के रूप में यह स्पष्ट है कि ऐसी पहलें समाज में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। गोल्डन आई शेफ हमें सिखाता है कि हमें किसी की कमी नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को पहचानना चाहिए।
गोल्डन आई शेफ आज उम्मीद, हौसले और समान अवसर का प्रतीक बन चुका है। यह पहल हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि असली दृष्टि आँखों में नहीं, बल्कि सोच में होती है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करें और एक समावेशी समाज के निर्माण में अपना योगदान दें, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिले।

