गंगा सिंह की अगुवाई में प्रमुख मांगें उठीं, अयाज़ खान अच्छू बने आमंत्रित सदस्य
लखनऊ।जनपथ कॉम्प्लेक्स, हजरतगंज स्थित भारतीय अधिवक्ता परिवार के कार्यालय में अधिवक्ताओं की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की प्रारंभिक अध्यक्षता हजरतगंज जनपद मार्केट के अध्यक्ष श्री रमेश श्रीवास्तव ने की, किंतु आकस्मिक कारणों से उनके प्रस्थान के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने अध्यक्षता संभाली।

बैठक का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारतीय अधिवक्ता परिवार के अध्यक्ष श्री गंगा सिंह ने किया। उनकी सक्रिय भूमिका और सशक्त वक्तव्य ने अधिवक्ता समाज की समस्याओं को नई दिशा प्रदान की।
अधिवक्ता समाज की पीड़ाओं पर गंभीर मंथन
गंगा सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिवक्ताओं के उत्पीड़न, असुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और आर्थिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ। गंगा सिंह ने कहा कि न्याय दिलाने वाला वर्ग स्वयं असुरक्षित होता जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रदेश सरकार के समक्ष अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें दोहराईं—
नए अधिवक्ताओं को 5 वर्षों तक प्रतिमाह ₹5,000 स्टाइपेंड
दुर्घटना में घायल अधिवक्ता को ₹10 लाख मुआवजा
60 वर्ष से अधिक आयु या गंभीर बीमारी की स्थिति में ₹25,000 मासिक पेंशन, साथ ही 30 वर्ष के नियमित अभ्यास पर भी यही सुविधा
अधिवक्ताओं के लिए निःशुल्क चिकित्सा सुविधा
अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को तत्काल लागू करना और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के स्वरूप में सुधार

गंगा सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद अधिवक्ता समाज की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा, “अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आवाज और अधिक बुलंद करें, ताकि न्याय के सिपाहियों को भी न्याय मिल सके।”
अयाज़ खान अच्छू बने आमंत्रित सदस्य
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय अयाज़ खान अच्छू को भारतीय अधिवक्ता परिवार का आमंत्रित सदस्य नियुक्त करना रहा। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ और अध्यक्ष गंगा सिंह ने औपचारिक घोषणा की।
अयाज़ खान अच्छू ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन को मजबूत करने और अधिवक्ताओं के हितों के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
बार काउंसिल चुनावों पर भी उठा सवाल
बैठक में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनावों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। श्रवण कुमार अवस्थी ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद कई प्रतिनिधि अधिवक्ताओं से कट जाते हैं और केवल सरकारी सुविधाओं तक सीमित रह जाते हैं।
वहीं श्रीमती किरण बाजपेयी ने नामांकन शुल्क की अधिकता और महिलाओं व दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण की कमी को न्याय व्यवस्था के लिए घातक बताया।
एकजुटता का संदेश
अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने अधिवक्ता हितैषी उम्मीदवारों को समर्थन देने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं का वोट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
बैठक में सत्येंद्र सिंह, प्रदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
यह बैठक अधिवक्ता समाज के लिए एक नई दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है, जिसने उनकी मांगों को एक मंच पर लाकर संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान की है।

