लेखक – अज़हर उमरी ( वरिष्ठ पत्रकार )
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में अगर किसी आवाज़ ने दिलों को सबसे गहराई से छुआ है, तो वह नाम है कुंदन लाल सहगल का। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का पहला सुपरस्टार गायक-अभिनेता माना जाता है, जिनकी गायकी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
🎤 शुरुआती जीवन
कुंदन लाल सहगल का जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत से गहरा लगाव था। उन्होंने किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना अपनी मेहनत और लगन से संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान बनाई।
🎬 फिल्मी करियर की शुरुआत
सहगल साहब ने अपने करियर की शुरुआत New Theatres, कोलकाता से की, जो उस समय फिल्म निर्माण का बड़ा केंद्र था। उनकी पहली बड़ी पहचान फिल्म देवदास से बनी, जिसमें उनके अभिनय और गायकी ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
🎶 गायकी का जादू
सहगल की आवाज़ में दर्द, मिठास और गहराई का अनोखा संगम था। उनके कुछ प्रसिद्ध गीत आज भी अमर हैं:
“बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए”
“जब दिल ही टूट गया”
“दीया जलाओ जगमग जगमग”
इन गीतों ने उन्हें भारतीय संगीत का अमर सितारा बना दिया।
🌟 अभिनय और संगीत का अनूठा संगम
कुंदन लाल सहगल केवल गायक ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता भी थे। उन्होंने तानसेन और स्ट्रीट सिंगर जैसी फिल्मों में अभिनय कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
💔 जीवन का अंत और विरासत
18 जनवरी 1947 को सहगल साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी आवाज़ आज भी हर संगीत प्रेमी के दिल में गूंजती है।
उनकी गायकी ने आगे आने वाले महान गायकों जैसे मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार और मुकेश को गहराई से प्रभावित किया।
कुंदन लाल सहगल हिंदी सिनेमा की वह नींव हैं, जिस पर आज का संगीत उद्योग खड़ा है। उनकी आवाज़ में जो सादगी और दर्द था, वह आज भी बेमिसाल है।
“सहगल साहब की आवाज़ सिर्फ सुनी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है।”

