लखनऊ। मदरसा संचालन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा है कि मदरसे बिना मान्यता के भी संचालित किए जा सकते हैं और सिर्फ मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को सील नहीं किया जा सकता।
⚖️ प्रशासन की कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई मदरसा शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा दे रहा है, तो केवल इस आधार पर कि वह किसी बोर्ड या परिषद से मान्यता प्राप्त नहीं है, उसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता। प्रशासन को ऐसी संस्थाओं के खिलाफ मनमानी कार्रवाई से बचना चाहिए।
📚 धार्मिक शिक्षा संविधान के दायरे में
लखनऊ बेंच ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा देना संविधान द्वारा संरक्षित अधिकारों के अंतर्गत आता है। जब तक मदरसे में कोई गैरकानूनी गतिविधि या कानून का उल्लंघन नहीं पाया जाता, तब तक उसे बंद या सील करना न्यायसंगत नहीं है।
🚫 सीलिंग पर रोक, नियमों का पालन जरूरी
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मदरसा अन्य कानूनों का उल्लंघन करता है—जैसे सुरक्षा, भवन मानक या सार्वजनिक व्यवस्था—तो प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का अधिकार रहेगा।
🗣️ फैसले के दूरगामी प्रभाव
इस टिप्पणी को मदरसा संचालकों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए राहत भरा फैसला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिना मान्यता वाले मदरसों पर हो रही कार्रवाइयों पर लगाम लगेगी।

