नई दिल्ली: सभी क्षेत्रों में श्रमिक कल्याण को मजबूत करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित श्रम सुधार 21 नवंबर, 2025 से लागू हो गए। सरकार ने चार नए श्रम कोड आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए हैं, जिनमें गिग वर्क, प्लेटफ़ॉर्म वर्क, महिला कर्मचारियों और एमएसएमई में काम करने वाले लोगों के लिए ऐतिहासिक सुधार शामिल हैं।
नए श्रम कोडों के तहत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर काम करने वाले लाखों लोगों को कानूनी स्पष्टता मिली है। एग्रीगेटर कंपनियों को अब अपने वार्षिक कारोबार का 1-2% कल्याण कोष में जमा करना होगा, जिससे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे।
श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह सुधार केवल मामूली बदलाव नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के तहत कार्यबल के कल्याण के लिए बड़ा कदम हैं। अब डिलीवरी और मोबिलिटी कर्मचारियों के घर और कार्यस्थल के बीच यात्रा में होने वाली दुर्घटनाएँ रोजगार से संबंधित मानी जाएंगी, जिससे उन्हें दुर्घटना मुआवजा मिलेगा।
नए कोड सभी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को रोकते हैं और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करते हैं। महिलाएँ अब रात्रि पाली में और पहले प्रतिबंधित उद्योगों में काम कर सकती हैं, बशर्ते सुरक्षा उपाय मौजूद हों। मातृत्व लाभ भी बढ़ाए गए हैं: 26 सप्ताह का सवेतन अवकाश, शिशुगृह सुविधाएँ, घर से काम करने के लचीले विकल्प और 3,500 रुपये का चिकित्सा बोनस। साथ ही, परिवार में सास-ससुर को भी शामिल किया गया है।
प्रमुख श्रमिक संगठनों ने नए श्रम कोडों का समर्थन किया है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कहा कि यह सुधार लंबित सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करेंगे और उन लाखों लोगों तक कवरेज का विस्तार करेंगे जो पहले औपचारिक दायरे से बाहर थे।

