डॉ सुहैल उमरी
एम डी (गोल्ड मेडलिस्ट).ई होमियोपैथी चिकित्सक
मोटापा आज केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक खामोश लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी के रूप में पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। यह बीमारी न तो अचानक हमला करती है और न ही तुरंत जान लेती है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाकर व्यक्ति को कई जानलेवा बीमारियों की ओर धकेल देती है।
क्या है मोटापा?
चिकित्सकीय भाषा में मोटापा वह स्थिति है, जब शरीर में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है और यह व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगती है। मोटापे का आकलन आमतौर पर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के माध्यम से किया जाता है, जो वजन और ऊंचाई के अनुपात से निर्धारित होता है।
यदि किसी व्यक्ति का बीएमआई 30 या उससे अधिक हो, तो उसे मोटापे से ग्रस्त माना जाता है, जबकि 40 से अधिक बीएमआई को अत्यंत गंभीर अवस्था माना जाता है, जहां कई मामलों में सर्जरी तक की आवश्यकता पड़ सकती है।
वैश्विक स्तर पर भयावह स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा अब एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है, जबकि लगभग 43 प्रतिशत वयस्क अधिक वजन की श्रेणी में आते हैं।
अनुमान के मुताबिक, विश्वभर में करीब 88 करोड़ वयस्क और 16 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि मोटापे के कारण हर साल लगभग 28 लाख लोगों की मौत होती है।
भारत में बढ़ता खतरा
भारत में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड संस्कृति, शारीरिक श्रम की कमी और अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। चिकित्सा अनुसंधान बताते हैं कि 2022 तक भारत में 12.5 करोड़ से अधिक बच्चे और किशोर मोटापे से ग्रस्त हो चुके हैं, जो आने वाले वर्षों में एक बड़े स्वास्थ्य संकट की चेतावनी है।
मोटापा और जानलेवा बीमारियाँ
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। यह 13 प्रकार के कैंसर—जिनमें स्तन, कोलोन, यकृत, गुर्दे, अग्नाशय, अंडाशय, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर शामिल हैं—के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
इसके अलावा मोटापा टाइप-2 मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, जोड़ों में दर्द, बांझपन और मानसिक अवसाद जैसी समस्याओं से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
केवल बीएमआई काफी नहीं
हाल के वर्षों में विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया है कि मोटापे का आकलन केवल बीएमआई के आधार पर करना पर्याप्त नहीं है। पेट, लिवर और हृदय के आसपास जमा वसा सबसे अधिक खतरनाक होती है, क्योंकि यही दीर्घकालिक बीमारियों की मुख्य वजह बनती है।
इसी कारण मोटापे को अब दो चरणों में विभाजित किया जा रहा है—
पहला चरण, जिसमें अभी स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है;
दूसरा चरण, जिसमें अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और व्यक्ति का दैनिक जीवन कठिन हो जाता है।
समाधान और जागरूकता ही बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना अनिवार्य है। समय रहते जीवनशैली में बदलाव कर मोटापे पर काबू पाया जा सकता है और इससे जुड़ी घातक बीमारियों से बचा जा सकता है।
मोटापा एक चेतावनी है—जिसे नज़रअंदाज़ करना आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा।
क्लीनिक। ABC0 क्लीनिक निगर भगत सिंह मूर्ति, टोरंट ऑफिस के सामने शहीद नगर आगरा

