नई दिल्ली / न्यूयॉर्क। आज दूसरा विश्व ध्यान दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पिछले वर्ष 21 दिसंबर को इसे आधिकारिक तौर पर घोषित किया था। यह तिथि उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति को ध्यान में रखते हुए चुनी गई है, जो आत्मनिरीक्षण और आंतरिक शांति का प्रतीक है।
इस अवसर पर भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित “वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए ध्यान” कार्यक्रम में एक ध्यान सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने युद्ध क्षेत्र में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए ध्यान योग के उपदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के मानव समाज की परिस्थितियां किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में आठ हजार सैनिक अंधकार और निराशा में फंसे हुए थे, लेकिन उन्होंने ध्यान किया और शांति प्राप्त की।
इस कार्यक्रम में विश्व के राजनयिक, संयुक्त राष्ट्र अधिकारी और योग प्रशिक्षक शामिल हुए, जिन्होंने ध्यान अभ्यास में भाग लेकर न केवल स्वयं में, बल्कि विश्व स्तर पर शांति और सद्भाव लाने का प्रयास किया।
यह कार्यक्रम भारत, अंडोरा, मेक्सिको, नेपाल और श्रीलंका के सहयोग से आयोजित किया गया। ये देश पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के तहत 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में मनाने के लिए अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं।

