कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों हलचल तेज है। विपक्षी एकता की चर्चाओं के बीच Mamata Banerjee का रुख अचानक बदला हुआ नजर आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि सीट बंटवारे और गठबंधन पर अंतिम फैसला लेने में Sonia Gandhi की ओर से करीब 9 दिनों की देरी ने राजनीतिक समीकरण बिगाड़ दिए। यही देरी अब तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के रिश्तों में दूरी की बड़ी वजह मानी जा रही है।
🔻 बंगाल में कांग्रेस का ‘ग्राफ गिरावट की कहानी’
कभी पश्चिम बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली Indian National Congress आज अपने सबसे कमजोर दौर में है।
- पहले: लगभग 39% वोट शेयर
- अब: घटकर 2.9%
यह गिरावट सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठन के कमजोर ढांचे, नेतृत्व की निष्क्रियता और जमीनी स्तर पर कैडर के टूटने की कहानी बयां करती है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि All India Trinamool Congress के उभार और भाजपा की आक्रामक रणनीति ने कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह विभाजित कर दिया।
⚡ ममता बनर्जी का ‘सॉफ्ट से हार्ड’ स्टैंड
Mamata Banerjee पहले विपक्षी गठबंधन की प्रमुख स्तंभ बनने की कोशिश में थीं। लेकिन लगातार देरी, अस्पष्टता और निर्णयहीनता से नाराज़ होकर अब उन्होंने ‘अकेले चलो’ का संकेत दे दिया है।
राजनीतिक संकेत साफ हैं—
👉 तृणमूल कांग्रेस अब बंगाल में किसी भी ‘कमजोर सहयोगी’ के साथ समझौते के मूड में नहीं है।
❓ राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल Rahul Gandhi की रणनीति को लेकर उठ रहा है।
क्या कांग्रेस—
- जानबूझकर ‘लो-प्रोफाइल’ खेल रही है?
- या फिर यह नेतृत्व की कमजोरी और ग्राउंड कनेक्शन की कमी है?
कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे “साइलेंट सरेंडर” तक बता रहे हैं, तो कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र इसे “लॉन्ग-टर्म प्लानिंग” का हिस्सा मानते हैं।
📊 असल लड़ाई: विचारधारा बनाम संगठन
बंगाल में अब मुकाबला केवल पार्टियों का नहीं, बल्कि—
- मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व (ममता)
- बनाम कमजोर राष्ट्रीय उपस्थिति (कांग्रेस)
का बन चुका है।
🔮 आगे क्या?
यदि विपक्षी दलों में तालमेल नहीं बनता, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। कांग्रेस के लिए यह ‘डू-ऑर-डाई’ जैसा मोड़ है—
- या तो संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करे
- या क्षेत्रीय दलों के बीच अपनी जगह और खो दे
📝 निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो कभी कांग्रेस की मजबूत पकड़ थी, वह अब लगभग खत्म हो चुकी है। Mamata Banerjee का आक्रामक रुख और कांग्रेस की धीमी रणनीति, विपक्षी एकता के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि Rahul Gandhi की रणनीति ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित होती है या फिर कांग्रेस के लिए एक और राजनीतिक गिरावट का कारण बनती है।

