नई दिल्ली :भारत के पहले स्वदेशी सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम SSII मंत्रा को विकसित करने वाली कंपनी SS Innovations International ने तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने 100 सफल रोबोटिक टेलीसर्जरी पूरी कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि स्वदेशी तकनीकी नवाचार के माध्यम से उन्नत सर्जिकल सेवाओं को दूर-दराज़ और वंचित क्षेत्रों तक सुरक्षित व विश्वसनीय रूप से पहुंचाया जा सकता है।
इस अवसर पर कंपनी की ओर से भारत की पहली मैराथन रोबोटिक टेलीसर्जरी का आयोजन किया गया, जिसमें एक ही दिन में 20 से अधिक टेली-सक्षम रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गईं। इस मैराथन में देश के कई प्रतिष्ठित रोबोटिक सर्जनों ने भाग लिया और विभिन्न जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को दूर बैठकर अंजाम दिया।

1.4 अरब की आबादी वाले भारत में, जहां अब भी उन्नत सर्जिकल देखभाल तक समान पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, यह उपलब्धि टेलीसर्जरी की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करती है। SSII मंत्रा के माध्यम से विशेषज्ञ सर्जन दूरस्थ स्थानों से सर्जरी कर सकते हैं, जिससे भौगोलिक असमानताओं को कम करने और एक अधिक समावेशी तथा टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण में मदद मिलती है। साथ ही, यह उपलब्धि भारत को वैश्विक मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल इनोवेशन के अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा करती है।
SS Innovations International के संस्थापक, चेयरमैन और सीईओ डॉ. सुधीर पी. श्रीवास्तव ने कहा कि SSII मंत्रा के साथ 100 टेलीसर्जरी पूरी होना भारतीय मेडटेक नवाचार के लिए एक निर्णायक क्षण है। उनके अनुसार यह मैराथन रोबोटिक टेलीसर्जरी बड़े पैमाने पर सटीकता और विश्वसनीयता का प्रमाण है और कंपनी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि उन्नत सर्जिकल देखभाल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित न रहे, बल्कि भारत में विकसित विश्वस्तरीय विशेषज्ञता सुरक्षित तकनीक के माध्यम से हर मरीज तक पहुंचे।
कार्यक्रम में राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और जेनिटल यूरिनरी ऑन्कोलॉजी के प्रमुख डॉ. सुधीर रावल ने कहा कि SSII मंत्रा के जरिए रोबोटिक टेलीसर्जरी उन कैंसर मरीजों के लिए सटीक और समय पर उपचार संभव बनाती है, जिन्हें विशेषज्ञ सर्जिकल सेवाओं तक सीधी पहुंच नहीं मिल पाती। उन्होंने इसे ऑन्कोलॉजी में देखभाल के नए मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
मोहक बैरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स के डायरेक्टर डॉ. मोहित भंडारी ने कहा कि यह उपलब्धि टेलीसर्जरी को भविष्य की अवधारणा से निकालकर एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान के रूप में स्थापित करती है और यह सिद्ध करती है कि जटिल सर्जरी भी बिना क्लीनिकल परिणामों से समझौता किए विकेंद्रीकृत की जा सकती हैं।
प्रीति यूरोलॉजी एंड किडनी हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. चंद्रमोहन वड्डी ने बताया कि टेलीसर्जरी के दौरान SSII मंत्रा सिस्टम की निरंतरता और तेज़ प्रतिक्रिया सर्जनों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और जटिल यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं के दायरे को और व्यापक बनाती है।
मणिपाल हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जन डॉ. ललित मलिक ने कहा कि हृदय शल्य चिकित्सा जैसी अत्यधिक सटीकता वाली विशेषज्ञताओं में पूर्ण विश्वसनीयता अनिवार्य होती है और SSII मंत्रा का प्रदर्शन इसकी मजबूती तथा उन्नत रिमोट कार्डियक केयर में बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है।
एपेक्स हॉस्पिटल, मुरादाबाद के सीनियर बैरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जन डॉ. मगन मेहरोत्रा ने कहा कि यह मैराथन रोबोटिक टेलीसर्जरी इस बात का प्रमाण है कि स्वदेशी तकनीक किस तरह छोटे शहरों और वंचित क्षेत्रों तक उन्नत सर्जिकल देखभाल पहुंचा सकती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनती हैं।
100 सफल टेलीसर्जरी और भारत की पहली मैराथन रोबोटिक टेलीसर्जरी के सफल आयोजन के साथ, SS Innovations International ने एक बार फिर SSII मंत्रा प्लेटफॉर्म की क्लीनिकल परिपक्वता और बड़े पैमाने पर उपयोग की क्षमता को सिद्ध किया है। यह उपलब्धि सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल देखभाल की पहुंच बढ़ाने के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारत को तकनीक-सक्षम रिमोट हेल्थकेयर समाधानों के वैश्विक बदलाव में अग्रणी भूमिका में स्थापित करती है।

