आगरा, – डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला संस्थान में उसके 25वें स्थापना रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित लालित्योत्सव श्रृंखला के अंतर्गत कार्यक्रम संख्या–13 में “ललित कलाओं का महत्व एवं भविष्य” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति आदरणीया प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायक नेतृत्व में संस्थान के निदेशक प्रो. संजय चौधरी के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना और राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, नैनाना, आगरा से आए आमंत्रित आचार्यगणों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यशाला में संयोजक डॉ. देवाशीष गांगुली ने ललित कला संस्थान की उपलब्धियों का परिचय प्रस्तुत किया और कला शिक्षा के महत्व पर प्रेरक विचार साझा किए। इसके साथ ही संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न कला विधाओं पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए, जिसमें संगीत एवं गायन की बारीकियों, मूर्तिकला की महत्ता एवं तकनीकें, चित्रकला के विविध आयाम, व्यावहारिक कला और छायांकन कला के नवीन दृष्टिकोण साझा किए गए।
कार्यशाला की खास बात यह रही कि जीजीआईसी सेमरा, आगरा से 412 विद्यार्थी और अन्य कला प्रेमियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने ललित कला संस्थान के उच्च स्तरीय सुविधाओं, उन्नत प्रयोगशालाओं और विविध पाठ्यक्रमों में विशेष रुचि दिखाई।
कार्यक्रम के सह-संयोजन दीपक कुलश्रेष्ठ ने किया और धन्यवाद ज्ञापन उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार ने प्रस्तुत किया। मंच संचालन अत्यंत आकर्षक और सुव्यवस्थित आर्ची द्वारा किया गया।
कार्यशाला ने न केवल विद्यार्थियों को कला के विविध आयामों से परिचित कराया, बल्कि ललित कलाओं के उज्ज्वल भविष्य की नई प्रेरणा भी प्रदान की। माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में आयोजित ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय में रचनात्मकता, नवाचार और कला संस्कृति को निरंतर नया आयाम प्रदान कर रहे हैं।

