ओवैसी को साधने में जुटा RJD, लेकिन अख्तरुल ईमान ने रख दी बड़ी शर्त हुई
पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब महज संख्या का खेल नहीं, बल्कि सियासी रणनीति और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। इस चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की भूमिका अचानक बेहद अहम हो गई है, जिससे महागठबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल की ओर से दिवंगत बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव को उम्मीद थी कि इस नाम पर AIMIM समर्थन दे सकती है और समीकरण आसान हो जाएंगे।
लेकिन कहानी में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता हिना शहाब नहीं, बल्कि राज्यसभा में AIMIM का अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
“उच्च सदन में AIMIM का खाता खुले”
अख्तरुल ईमान ने पटना में पत्रकारों से कहा कि वर्तमान में राज्यसभा में AIMIM का कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में पार्टी चाहती है कि इस बार उसका खाता खुले। उन्होंने महागठबंधन के दलों से अपील की कि वैचारिक समानता के आधार पर AIMIM प्रत्याशी को समर्थन दिया जाए, ताकि संसद में विपक्ष की आवाज और बुलंद हो सके।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि असदुद्दीन ओवैसी जिस बेबाकी से अपनी बात रखते हैं, वैसी स्पष्टता और साहस महागठबंधन के कई नेताओं में नजर नहीं आता।
महागठबंधन के लिए नई चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM का यह रुख महागठबंधन के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है। अगर समर्थन को लेकर सहमति नहीं बनती है तो वोटों का बिखराव संभव है, जिससे चुनावी नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या RJD और कांग्रेस AIMIM को साधने में सफल होंगे, या फिर बिहार की सियासत में एक नया मोड़ देखने को मिलेगा।
बिहार की राजनीति में इस बार राज्यसभा चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि ताकत, रणनीति और भविष्य की दिशा तय करने का चुनाव बनता जा रहा है।

