लेखक: तबस्सुम अब्बास
(शिक्षाविद, सामाजिक चिंतक एवं शिक्षिका)
आज की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि हम नन्हे बच्चों से वह अपेक्षाएँ रखने लगे हैं, जो उनके मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास के अनुकूल नहीं हैं। विशेषकर प्री-प्राइमरी और प्राथमिक स्तर के बच्चों को प्रतिदिन गृहकार्य देना, उनके बचपन पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है।
छोटे बच्चे सीखते हैं—खेल से, बातचीत से, अनुभव से और अनुकरण से। जब स्कूल में पढ़ाई के बाद घर पर भी उन्हें कॉपियाँ भरने, लिखने-पढ़ने और अधूरे कार्य पूरे करने का दबाव दिया जाता है, तो सीखना आनंद नहीं, मजबूरी बन जाता है।
स्कूल ही हो सीखने का केंद्र
यदि बच्चों का पूरा शैक्षिक कार्य स्कूल में ही करवा दिया जाए, तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
पहला, बच्चा घर को पढ़ाई के दबाव से मुक्त, सुरक्षित और आनंददायक स्थान के रूप में देखेगा।
दूसरा, माता-पिता और बच्चों के बीच संबंध तनाव की बजाय संवाद और स्नेह पर आधारित होंगे।
तीसरा, हर बच्चे को शिक्षक के मार्गदर्शन में समान अवसर मिलेगा, क्योंकि सभी अभिभावक पढ़े-लिखे या समय देने में सक्षम नहीं होते।
गृहकार्य नहीं, गृह-अनुभव जरूरी
यह समझना आवश्यक है कि घर पर बच्चे का समय “गृहकार्य” के लिए नहीं, बल्कि “गृह-अनुभव” के लिए होना चाहिए।
परिवार के साथ बातचीत, कहानियाँ सुनना, चित्र बनाना, खेलना, प्रकृति को देखना—ये सभी अनुभव बच्चे की समझ और संवेदनशीलता को गहराई देते हैं, जो किसी भी लिखित गृहकार्य से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
शिक्षक की भूमिका और जिम्मेदारी
शिक्षक यदि योजनाबद्ध तरीके से स्कूल के समय में ही अभ्यास, दोहराव और गतिविधियाँ करवा दें, तो गृहकार्य की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
इससे शिक्षक भी यह स्पष्ट रूप से समझ पाते हैं कि किस बच्चे को किस स्तर पर सहायता की आवश्यकता है।
नीति निर्धारकों से अपेक्षा
आज आवश्यकता है कि शिक्षा नीतियाँ केवल पाठ्यक्रम पर नहीं, बल्कि बच्चे के संपूर्ण विकास पर केंद्रित हों। छोटे बच्चों के लिए “नो होमवर्क पॉलिसी” को व्यवहार में लाया जाए और स्कूलों को इसके लिए पर्याप्त संसाधन व प्रशिक्षण दिया जाए।
बचपन सीखने की पहली सीढ़ी है, परीक्षा की तैयारी नहीं।
यदि हम चाहते हैं कि बच्चे जिज्ञासु, आत्मविश्वासी और खुशहाल बनें, तो उन्हें किताबों के बोझ से पहले मुस्कान और खेलने का अधिकार देना होगा।
छोटे बच्चों का गृहकार्य—स्कूल में ही पूरा हो, और घर सिर्फ घर रहे।

