नई दिल्ली: आज पूरे देश में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने जनजातीय इतिहास और विरासत को जीवित रखने के महत्व को ध्यान में रखते हुए 15 नवंबर को इस दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।
समय के साथ यह उत्सव जनजातीय गौरव सप्ताह के रूप में विस्तारित हो गया है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और शैक्षिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, ताकि जनजातीय नायकों की विरासत को जीवंत रखा जा सके।
सरकार ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में संग्रहालयों और स्मारकों के विकास पर भी जोर दिया है। देश के 10 राज्यों में 11 संग्रहालयों को मंजूरी दी गई है, जिनमें रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मारक पार्क-सह-संग्रहालय सहित तीन का उद्घाटन पहले ही हो चुका है। रायपुर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर डिजिटल संग्रहालय का नाम वीर नारायण सिंह के नाम पर रखा गया है।
इसके अलावा, देश भर में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, तांत्या भील विश्वविद्यालय, और अल्लूरी सीताराम राजू व बिरसा मुंडा की मूर्तियाँ जैसे सार्वजनिक स्थल आदिवासी विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
आदि शौर्य ई-बुक और आदिवासी नेताओं पर अमर चित्र कथा संकलन सहित पुस्तकों, कॉमिक्स और डिजिटल सामग्री के प्रकाशन ने देश में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिरसा मुंडा, पाइका विद्रोह और रानी गाइदिन्ल्यू को समर्पित स्मारक सिक्के और डाक टिकट भी जारी किए हैं।
पिछले एक दशक में, जनजातीय विकास अब एक राष्ट्रव्यापी मिशन के रूप में उभरा है। आज 42 मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के लिए विभिन्न विकास कार्य योजनाओं के माध्यम से सक्रिय रूप से जनजातीय कल्याण में योगदान दे रहे हैं।
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