नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने संसद में दिए गए अपने जिउ-जित्सु वाले उदाहरण को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi राजनीतिक “पकड़” और “दबाव” में फंसे हुए हैं, जो आम जनता को दिखाई नहीं देते।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कई लोगों ने उनसे पूछा कि उन्होंने अपने भाषण में जिउ-जित्सु का उदाहरण क्यों दिया। उन्होंने कहा, “जिउ-जित्सु में प्रतिद्वंद्वी को नियंत्रित करने के लिए पकड़ और दबाव का इस्तेमाल किया जाता है। राजनीति में भी इसी तरह की रणनीतियां होती हैं, लेकिन वे खुलकर दिखाई नहीं देतीं।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक पकड़ और दबाव अक्सर छिपे रहते हैं और उन्हें समझने के लिए बारीकी से देखना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबावों के बीच “फंसे” हुए हैं।
अमेरिका में चल रहे अडानी प्रकरण और तथाकथित एपस्टीन मामले का उल्लेख करते हुए गांधी ने कहा कि कुछ भारतीय नाम ऐसी फाइलों से जुड़े हैं जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर चीन भारत की सीमा पर मौजूद है और दूसरी ओर अमेरिका है, और भारत के प्रधानमंत्री इन दोनों के बीच दबाव की स्थिति में हैं।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक छवि वित्तीय समर्थन के सहारे बनाई गई है और उस पर नियंत्रण भारत से बाहर के तत्वों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि संभावित नीतिगत फैसलों का असर किसानों और वस्त्र उद्योग पर पड़ सकता है, साथ ही यह आशंका जताई कि भारत को अमेरिका से आयात बढ़ाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
डेटा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए गांधी ने कहा कि “सबसे महत्वपूर्ण मसला डेटा का है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का डेटा अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत पर सौंपा जा रहा है और चेतावनी दी कि देश “डेटा कॉलोनी” बनने की दिशा में बढ़ सकता है।
उन्होंने सवाल किया कि भारत अमेरिका के साथ डेटा, कृषि और उद्योग से जुड़े समझौते क्यों करेगा, और कहा कि इसका उत्तर प्रधानमंत्री पर पड़े “दबाव” में छिपा है।

