ग्रेटर नोएडा। माह-ए-रमजान के मुकद्दस दिनों में शहर का माहौल इबादत और रूहानियत से सराबोर नजर आ रहा है। रोजेदार अल्लाह के हुक्म की तामील करते हुए रोजा रख रहे हैं। मस्जिदों और घरों में दिनभर कुरआन की तिलावत, नमाज और दुरूद-ओ-सलाम का सिलसिला जारी है।
मस्जिदों में बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग नमाज अदा करते दिखाई दे रहे हैं, वहीं घरों में महिलाएं इबादत के साथ सहरी और इफ्तार की तैयारियों में जुटी हैं।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता रूखसार नाज ने सभी को माह-ए-रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इसी पवित्र महीने में कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ, जिसका पढ़ना, सुनना और देखना भी इबादत है। उन्होंने कहा कि कुरआन पूरी दुनिया के लिए हिदायत है और इसके बताए उसूलों पर अमल करके अमन और इंसाफ कायम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुरआन 23 वर्षों में अलग-अलग मौकों पर नाजिल हुआ और इसका एक-एक लफ्ज सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि रमजान के रोजे हर उस मुसलमान पर फर्ज हैं जो बालिग, अकलमंद और तंदुरुस्त हो। यह इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक अहम स्तंभ है और पुरुषों व महिलाओं दोनों पर समान रूप से अनिवार्य है।
रोजा देता है इंसानियत और मदद का पैगाम
रूखसार नाज ने कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। रोजा भूख-प्यास का एहसास कराकर इंसान को जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देता है। उन्होंने अपील की कि इस महीने में गरीबों और जरूरतमंदों की ज्यादा से ज्यादा मदद की जाए, ताकि समाज में भाईचारा मजबूत हो।
उन्होंने कहा, “रमजान सुधार और बदलाव का महीना है। अगर इंसान अपने नफ्स की हिफाजत कर ले तो उसका रोजा कुबूल हो जाता है। अल्लाह ने अमीर और गरीब को एक ही कतार में खड़ा कर दिया है, ताकि अमीर जरूरतमंदों पर रहम करें और इंसानियत को बढ़ावा मिले।”
उन्होंने लोगों से अपनी नेक कमाई में से अधिक से अधिक जकात निकालने और ईद से पहले फितरा अदा करने की अपील की, ताकि गरीब और बेसहारा लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
रूखसार नाज ने स्पष्ट किया कि बीमार, अत्यंत बुजुर्ग, मुसाफिर, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा मासिक धर्म की स्थिति में महिलाओं को रोजा न रखने की अनुमति है, हालांकि बाद में उन्हें कज़ा रोजे रखने होते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि इस्लाम में मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है और रमजान हमें यह सिखाता है कि हमारे आसपास कोई भी व्यक्ति भूखा या परेशान न रहे।
— संवाददाता, Times of Taj

