बांदा। साजन के लिए सजी-धजी सुहागिनों ने शुक्रवार को करवा चौथ पर यह गीत खूब बजाया और सुना की “बुरा हो भला हो कैसा भी हो,मेरा पती तो मेरा देवता है”। अधिकांश विवाहिताओं नें इसी गीत की गुनगुनाहट के साथ देर शाम चांद और अपने पति के दीदार किए। अपने हमसफर की लंबी उम्र के लिए कामना की। दिनभर निर्जला व्रत रखा। चांद को अर्घ्य देकर शिवचंद्र व कार्तिकेय का पूजन अर्चन कर पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का परायण किया।

रात करीब सवा 8 बजे चांद का उदय हुए। सुहागिनें इसका छतों या खुले स्थान पर खड़े होकर बेताबी से इंतजार कर रही थीं। छलनी से चांद के दर्शन कर पति की आरती उतारी। जिनके पति बाहर थे उनकी पत्नियों ने वीडियो काल के जरिये पति के दीदार किए और व्रत तोड़ा।
आचार्य पंडित श्रवण कुमार का कहना है कि महिलाएं इस व्रत को पति की रक्षा के लिए रखती हैं। पांडु कुमार एक बार नीलगिरी पर्वत में फंस गए थे। श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को करवाचौथ का व्रत रखने को कहा था। व्रत रखने से उनकी विपत्तियां दूर हो गई थीं।इसके पूर्व दिनभर पर्व की खरीदारी करने वालों से बाजार भरपूर रही।

