समय पर पहचान ही बचाव : मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता – डॉ. संदीप अग्रवाल
देश में तेजी से बढ़ते मुंह के कैंसर के मामले: कारण, पहचान और बचाव के उपाय
आगरा : पुरुषोत्तमदास सावित्रीदेवी कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर और वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल का कहना है कि भारत में मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। यह बीमारी न केवल जीवन के लिए खतरनाक है, बल्कि देर से पहचान होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान भी ले लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर जांच और सही इलाज हो, तो अधिकांश मरीजों को बचाया जा सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं मुंह के कैंसर के मामले?
मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
तंबाकू और गुटखा का सेवन
भारत में धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी) और बिना धुएं वाले तंबाकू (गुटखा, पान मसाला, खैनी) का व्यापक उपयोग होता है। यह मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है।
शराब का अत्यधिक सेवन
शराब और तंबाकू का एक साथ सेवन करने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
खराब मौखिक स्वच्छता
दांतों और मसूड़ों की अनदेखी से संक्रमण और लंबे समय तक रहने वाले घाव उत्पन्न होते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं।
पोषण की कमी
विटामिन A, C और आयरन की कमी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है और कैंसर का खतरा बढ़ाती है।
एचपीवी संक्रमण (HPV)
कुछ मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) भी मुंह के कैंसर का कारण बनता है।
समय पर पहचान क्यों जरूरी है?
मुंह का कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर बिना दर्द के होता है, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यदि इसे प्रारंभिक अवस्था में पहचान लिया जाए, तो इलाज की सफलता दर 80-90% तक हो सकती है। इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
– मुंह में लंबे समय तक न भरने वाला घाव या छाला
– मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे
– मुंह खोलने या निगलने में परेशानी
– लगातार दर्द, जलन या सूजन
– आवाज में बदलाव या भारीपन
यदि ये लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
सही जांच और इलाज कैसे बचा सकता है जान?
नियमित स्क्रीनिंग
तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले लोगों को हर 6 महीने में मुंह की जांच अवश्य करानी चाहिए।
प्रारंभिक बायोप्सी और जांच
किसी भी संदिग्ध घाव की तुरंत जांच कराना जरूरी है, ताकि बीमारी का समय रहते पता चल सके।
आधुनिक उपचार विधियां
आज सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के माध्यम से मुंह के कैंसर का प्रभावी इलाज संभव है—खासतौर पर शुरुआती चरण में।
जागरूकता और शिक्षा
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इसके लक्षण और जोखिम के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय
– तंबाकू और गुटखा का सेवन पूरी तरह बंद करें
– शराब का सेवन सीमित रखें
– नियमित रूप से दांतों और मुंह की सफाई करें
– संतुलित और पौष्टिक आहार लें
– समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं
निष्कर्ष
मुंह का कैंसर एक गंभीर लेकिन काफी हद तक रोके जाने योग्य रोग है। इसके बढ़ते मामलों को रोकने के लिए समाज, सरकार और स्वास्थ्य तंत्र को मिलकर काम करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण है—जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार। यदि इन पर ध्यान दिया जाए, तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
Purushottam Das Savitri Devi Cancer Care And Research Center के डायरेक्टर और वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल का कहना है कि यदि लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर इलाज कराएं, तो मुंह के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

