आगरा। दिनभर काम और रात को आराम… स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक इस दिनचर्या को अधिकांश लोग नहीं अपना रहे हैं। मोबाइल-लैपटॉप और पार्टियों के कारण देर रात तक जाग रहे हैं। इससे जैविक चक्र प्रभावित होने से हार्मोंस गड़बड़ा रहे हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से युवा उम्र से 10 साल बड़े दिख रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में ऐसे 22 फीसदी युवाओं में ये परेशानी देखने को मिली है।
मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले 680 मरीजों पर अध्ययन किया गया। इनमें 12-25 साल के 18 फीसदी, 26-50 साल के 32 फीसदी और 51 साल से अधिक उम्र के 50 फीसदी लोगो में अनिद्रा की परेशानी मिली। पहली श्रेणी में पढ़ाई-प्रतिशतता के दबाव से नींद प्रभावित मिली।
5 फीसदी में देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप उपयोग भी वजह रही। इससे याददाश्त कमजोर और एकाग्रता की कमी मिली। दूसरी श्रेणी में मोबाइल-लैपटॉप पर लंबी चैटिंग और रात की पार्टियों के चलते 12 से एक बजे सोने वाले लोगों ने बताया कि 10 से अधिक साल से ऐसा चला आ रहा है। इससे आंखों की रोशनी-रोग प्रतिरोधक क्षमता कम मिली, चेहरे पर झुर्रियां, बाल कम होना-सफेद होना, मांसपेशियों में कमजोरी, आंखों के नीचे धब्बे, मोटापा की परेशानी मिली। साथ ही व्यवहार में चिड़चिड़ापन, तनाव, जल्द थकान होने जैसी समस्याएं मिलीं।
इनमें से 22 फीसदी की उम्र 8-10 साल अधिक प्रतीत दिख रही थी। 51 साल से अधिक के लोगों में आयु-बीमारी संबंधी वजह मिलीं। खास बात यह है कि दवाओं, पूरी नींद, पौष्टिक भोजन और दिनचर्या सुधारने से 64 फीसदी में अनिद्रा की परेशानी दूर हुई और स्वास्थ्य में सुधार हुआ।

