श्रीनगर | TIMES OF TAJ विशेष रिपोर्ट
पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अब अपनी गतिविधियों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। धार्मिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण शिविरों के बाद अब ये संगठन स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन संगठनों द्वारा संचालित या प्रभावित संस्थानों में छोटे बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार किया जा रहा है। अभिभावकों को मुफ्त शिक्षा, भोजन और आर्थिक सहायता जैसे प्रलोभन देकर आकर्षित किया जा रहा है।
इन संस्थानों में सामान्य पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के बीच कट्टर सोच को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। विभिन्न गतिविधियों, भाषणों और कार्यक्रमों के जरिए उन्हें एक विशेष विचारधारा की ओर प्रभावित किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह अभियान पिछले कुछ समय से योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इसमें खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद में इन संस्थानों में भेज दें।

सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में बच्चों को पाकिस्तान के शहरों जैसे लाहौर, कराची और बहावलपुर आदि में स्थित संस्थानों में भी भेजा जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। स्थानीय स्तर पर भी इन संगठनों के प्रति असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते अब नई पीढ़ी को प्रभावित करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
क्या हैं मुख्य चिंताएं?
- बच्चों के जरिए विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को टारगेट करना
- शिक्षा के नाम पर वैचारिक प्रभाव
- क्षेत्रीय सुरक्षा पर संभावित खतरा
TIMES OF TAJ अपील:
समाज में जागरूकता और बच्चों की सुरक्षित व संतुलित शिक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक या कट्टर सोच से नई पीढ़ी को बचाया जा सके।

