लखनऊ। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जालौन के उरई में आयोजित कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के शहीद-ए-आजम भगत सिंह को लेकर दिए गए बयान से विवाद खड़ा होने की संभावना है। राही ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय के हिसाब से तुलना करें तो भगत सिंह “बेवकूफ और बेकार बच्चे” थे। हालांकि, उन्होंने अपने वक्तव्य में भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के त्याग और देश के लिए उनके समर्पण को भी रेखांकित किया।
रिंकू सिंह राही वर्तमान में उरई में एसडीएम न्यायिक के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और उसमें आम लोगों की भागीदारी पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय, एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज, एडीएम नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद और ईडीएम पुष्पेंद्र सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
स्वतंत्रता आंदोलन में आम लोगों की भूमिका पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में राही ने इतिहास का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि अंग्रेजों के शासन में किसानों के शोषण के लिए केवल अंग्रेज अधिकारी ही जिम्मेदार थे या स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले भारतीय अधिकारी और कर्मचारी भी इसकी वजह थे।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर में प्रत्यक्ष रूप से बहुत कम लोग शामिल हुए थे। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में लोग अपनी सामान्य दिनचर्या, परिवार और धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त रहते थे। धीरे-धीरे कुछ लोगों में देश और स्वतंत्रता को लेकर चेतना पैदा हुई और उन्होंने अपने निजी हितों से आगे बढ़कर देश के लिए संघर्ष करना शुरू किया।
‘भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ और बेकार बच्चे थे’
राही ने क्रांतिकारियों के पारिवारिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि क्या भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के परिवार नहीं थे। इसके बाद उन्होंने कहा कि “आज के समय के हिसाब से तुलना करूं तो लगता है कि भगत सिंह सबसे बेवकूफ और बिल्कुल बेकार बच्चे थे। वे घर के हिसाब से बागी थे।”
हालांकि, इसके साथ ही राही ने कहा कि यही लोग थे जिन्होंने अपने परिवार और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर खुद को देश के साथ खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने अपने जीवन और परिवार की परवाह किए बिना देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया।
राही ने कहा कि आजादी एक ऐसा विचार था जिसे कुछ लोगों ने समझा और उसके लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में देश के लिए त्याग और जिम्मेदारी की वही भावना समाज को फिर से समझने की जरूरत है, जो भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के भीतर थी।
पीसीएस से आईएएस तक का सफर
रिंकू सिंह राही मूल रूप से हाथरस के सासनी क्षेत्र के गांव ऊसवा के रहने वाले बताए जाते हैं। 12वीं में अच्छे अंक हासिल करने के बाद उन्हें छात्रवृत्ति मिली। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक की पढ़ाई की।
उन्होंने वर्ष 2004 में पीसीएस परीक्षा पास की और सरकारी सेवा में आए। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हिस्सा लिया। वर्ष 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और इसके बाद वह आईएएस अधिकारी बने।
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर शहीद भगत सिंह को लेकर दिए गए बयान में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर अब सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है।
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