ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में राष्ट्रपति पद को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान पर विराम लग गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं।
बांग्लादेशी संसद भवन में हुए चुनाव में मिर्जा फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। मुख्य चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान के बाद उनकी जीत की आधिकारिक घोषणा की गई।
यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। इससे पहले 1991 में इस तरह का चुनाव हुआ था।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मिर्जा फखरुल ने BNP के महासचिव पद और पार्टी की राष्ट्रीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया था।
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति पद खाली हुआ था। संविधान के अनुसार, पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर संसद द्वारा नए राष्ट्रपति का चुनाव किया जाना जरूरी है।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक माना जाता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार के पास रहती हैं। ऐसे में BNP के वरिष्ठ नेता का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचना बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
