अस्ताना हज़रत मैक़श ख़ानक़ाह क़ादरिया नियाज़िया में महफ़िल-ए-मीलाद व नातिया नशिस्त का आयोजन
आगरा। मेवा कटरा स्थित अस्ताना हज़रत मैक़श ख़ानक़ाह क़ादरिया नियाज़िया में हज़रत इमाम जाफ़र-ए-सादिक़ की विलादत की ख़ुशी में जश्न-ए-विलादत का शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम ख़ानक़ाह के सज्जादानशीन हज़रत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह की सरपरस्ती में आयोजित हुआ।
इस मौक़े पर महफ़िल-ए-मीलाद और नातिया नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें शाहिद नदीम, माहिर अकबराबादी और हातिफ़ औरंगाबादी ने अपनी नातिया कलाम पेश किए। महफ़िल के दौरान दरूद-ओ-सलाम पढ़ा गया और ज़िक्र-ए-रसूल ﷺ से माहौल रूहानी हो गया।
हज़रत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह ने मौजूद मुरीदीन और मेहमानों को ख़िताब करते हुए हज़रत इमाम जाफ़र-ए-सादिक़ की इल्मी और रूहानी ख़िदमात पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि बुज़ुर्गाने दीन की ज़िंदगी हमारे लिए इल्म, अमल, सब्र, इंसानियत और मोहब्बत का पैग़ाम है। हमें उनकी तालीमात पर अमल करते हुए समाज में भाईचारे और अमन को बढ़ावा देना चाहिए।
हज़रत सैयद अंबर अली शाह क़ादरी चिश्ती नियाज़ी ने कार्यक्रम में तशरीफ़ लाने वाले तमाम मेहमानों का इस्तक़बाल किया और उनका शुक्रिया अदा किया।
ख़ानक़ाह के जानशीन हज़रत सैयद फ़ैज़ अली शाह क़ादरी चिश्ती नियाज़ी ने भी मौजूद लोगों को ख़िताब किया। उन्होंने कहा कि बुज़ुर्गाने दीन की तालीमात इंसान को मोहब्बत, भाईचारे और नेक रास्ते पर चलने की हिदायत देती हैं। इन तालीमात को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना ही बुज़ुर्गों से सच्ची अकीदत है।
कार्यक्रम के दौरान फ़ातिहा-ख़्वानी की गई और लंगर भी तक़सीम किया गया। दानिश नियाज़ी, ताबिश नियाज़ी और शारिक़ नियाज़ी ने मीलाद पढ़ी और ज़िक्र-ए-रसूल ﷺ पेश किया।
बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने की शिरकत
मीलाद कार्यक्रम में मुख्य रूप से सैयद शब्बर अली शाह, सैयद महमूद उज्ज़मा, सैयद अली, सैयद यूसुफ़, सैयद सऊद उज्ज़मा, सैयद दाऊद, सैयद मसूद अहमद, हाजी इम्तियाज़, बरकत अली, ज़ाहिद हुसैन, सनी, शादाब, ताज भाई, इलियास, अख़्तर, जमाल अहमद, अनस, हमज़ा, लईक़, एजाज़, आमिर, अशरफ़ समेत बड़ी तादाद में मुरीदीन और अकीदतमंद मौजूद रहे।
कार्यक्रम के आख़िर में मुल्क में अमन-ओ-अमान, ख़ुशहाली, तरक़्क़ी, आपसी भाईचारे और कौम की बेहतरी के लिए ख़ुसूसी दुआ की गई।
