खराब मोबाइल, चार्जर, केबल और इलेक्ट्रॉनिक सामान होंगे जमा; अधिकृत रिसाइक्लर्स से कराया जाएगा निस्तारण
लखनऊ। प्रदेश के सभी स्कूलों में अब ई-कचरा संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों पर खराब मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, कैलकुलेटर, की-बोर्ड समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा किया जाएगा। विद्यार्थियों को ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत 15 सितंबर से स्कूलों में दो चरणों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
स्पेशल कैंपेन की शुरुआत वर्ष 2021 में सरकारी कार्यालयों से पुराने रिकॉर्ड हटाने के अभियान के रूप में हुई थी। इसके बाद हुए पांच अभियानों में कबाड़ प्रबंधन, ई-ऑफिस और शौचालय जैसी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया। अब अभियान के छठे चरण में स्कूलों में ई-कचरा प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।
चार श्रेणियों में रखा जाएगा ठोस कचरा
स्कूलों में ठोस कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग रखा जाएगा। हरे डिब्बे में गीला कचरा, जैसे रसोई का कचरा और फल-सब्जियों के छिलके रखे जाएंगे। नीले डिब्बे में कागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी का कचरा जमा होगा। लाल डिब्बे में सैनिटरी कचरा और काले डिब्बे में पेंट के डिब्बे, एक्सपायर दवाएं और खराब बल्ब जैसी वस्तुएं रखी जाएंगी।
अधिकृत एजेंसियों से होगा ई-कचरे का निस्तारण
ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) तथा अधिकृत एजेंसियों के साथ समन्वय करेंगे। स्कूलों से एकत्र ई-कचरे का निस्तारण अधिकृत रिसाइक्लर्स के माध्यम से कराया जाएगा।
क्षतिग्रस्त लिथियम बैटरी, रिसाव वाले सेल और अन्य खतरनाक इलेक्ट्रॉनिक सामान को विद्यार्थियों द्वारा खोलने या स्वयं निस्तारित करने पर रोक रहेगी। ऐसे ई-कचरे को सुरक्षित तरीके से अधिकृत एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
निबंध, स्लोगन और पेंटिंग प्रतियोगिताएं होंगी
अभियान के दौरान विद्यार्थियों के बीच निबंध, स्लोगन, पेंटिंग और मॉडल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।
स्कूलों के ईको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से बचने तथा 3आर—कम उपयोग, दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य स्कूलों में स्वच्छता के साथ-साथ बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन की आदत विकसित करना है।
