एस. मुनीर
अलीगढ़। एएमयू परिसर में यह अफवाह तेजी से फैल रही है कि अंग्रेजी विभाग के एक शिक्षक को अगला प्रिंसिपल, वुमेंस कॉलेज बनाया जाना है। पता चला है कि वर्तमान प्रिंसिपल 16 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की जानी है। इस अफवाह को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि अभी तक इस पद के लिए नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया है। आदेश जारी करने में देरी से यह चिंता बढ़ रही है कि प्रिंसिपल के रूप में किसे नियुक्त किया जाना है और इसे गुप्त क्यों रखा जा रहा है।
वर्तमान प्रिंसिपल से पहले इस पद पर आसीन प्रिंसिपल ने 22 अप्रैल 2024 को पद खाली किया था, यानी दो साल से अधिक समय पहले। वर्तमान पदाधिकारी कॉलेज के वरिष्ठतम शिक्षण स्टाफ होने के कारण स्थापित परंपरा के अनुसार अस्थायी प्रिंसिपल के रूप में कार्यभार संभाला था। कॉलेज विश्वविद्यालय में एक विशेष स्थान रखता है, क्योंकि यह छात्राओं को सशक्त बनाने का कार्य करता है और इसलिए एक महत्वपूर्ण संस्थान है।
वुमेंस कॉलेज विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठान का अभिन्न हिस्सा नहीं है, बल्कि एएमयू के अधीन एक अनुरक्षित संस्थान है और प्रिंसिपल की नियुक्ति राष्ट्रीय विज्ञापन के माध्यम से की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक उम्मीदवारों को अवसर मिल सके और इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति का चयन किया जा सके। यह प्रक्रिया वुमेंस कॉलेज को ऐसा प्रिंसिपल उपलब्ध कराने के लिए की जाती है, जो इसके विकास में योगदान दे सके।
विश्वविद्यालय के शिक्षक इस बात को लेकर नाराजगी जताते रहे हैं कि विश्वविद्यालय ने दो साल से अधिक समय तक स्थायी प्रिंसिपल नियुक्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इससे वर्तमान अनिश्चितताएं पैदा हुई हैं और अजीबोगरीब अफवाहों को बढ़ावा मिला है, जिनमें एक विशेष बहुत बड़े राष्ट्रीय संगठन के अदृश्य प्रभाव की बात भी शामिल है। आरोप है कि यह संगठन विश्वविद्यालय में शिक्षकों और उच्च अधिकारियों की नियुक्तियों को प्रभावित करता रहा है।
विश्वविद्यालय के शिक्षक वुमेंस कॉलेज को लेकर चिंतित हैं, जो महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने और उन्हें जीवन में सशक्त बनाने का कार्य करता है। शिक्षकों को उम्मीद है कि कॉलेज गलत हाथों में नहीं जाएगा।
विश्वविद्यालय के शिक्षक इस बात पर एकमत हैं कि जब तक प्रिंसिपल के पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक स्थापित परंपरा के अनुसार वरिष्ठतम शिक्षक को अस्थायी प्रिंसिपल नियुक्त करने की व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए, ताकि कॉलेज के मूल्यों और शैक्षणिक मानकों को कोई नुकसान न पहुंचे।
