जमीयत उलेमा महाराष्ट्र की कानूनी सहायता समिति कर रही पैरवी, अधिवक्ता एमएस खान ने पेश की मौखिक और लिखित दलीलें
प्रयागराज, । वाराणसी के प्रसिद्ध संकेत मोचन मंदिर बम विस्फोट मामले में सत्र अदालत से फांसी की सजा पाए मुफ्ती वलीउल्लाह की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में जमीयत उलेमा महाराष्ट्र की कानूनी सहायता समिति की ओर से पैरवी की जा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव, मामले की सुनवाई कर रही है। बुधवार को दिल्ली से प्रयागराज पहुंचे अधिवक्ता एमएस खान ने अदालत में बहस शुरू की। उन्होंने मौखिक बहस के साथ अपनी लिखित दलीलें भी अदालत में दाखिल कीं, जिन्हें कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
अदालत ने अपर महाधिवक्ता को 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे बहस के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मुफ्ती वलीउल्लाह की ओर से पेश अधिवक्ता एमएस खान बाहर से आते हैं, इसलिए निर्धारित समय पर उनकी बहस शुरू की जाए।
जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के अनुसार, जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी के निर्देश पर कानूनी सहायता समिति इस मामले की निचली अदालत से ही पैरवी कर रही है। ट्रायल कोर्ट में भी मुफ्ती वलीउल्लाह को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई थी।
2006 के वाराणसी बम धमाकों से जुड़ा है मामला
मामले के अनुसार 7 मार्च 2006 को वाराणसी के प्रसिद्ध संकेत मोचन मंदिर में शाम करीब छह बजे बम विस्फोट हुआ था। इसी दिन वाराणसी रेलवे स्टेशन पर भी विस्फोट हुआ था। पुलिस ने अगले दिन 8 मार्च 2006 को थाना लंका में सब-इंस्पेक्टर समरजीत की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी।
पुलिस के अनुसार मुफ्ती वलीउल्लाह को 5 अप्रैल 2006 को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 302, 307 और 324 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं 3, 4 और 5 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
वर्ष 2011 में गाजियाबाद की विशेष अदालत ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई शुरू की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 48 गवाह अदालत के सामने पेश किए।
6 जून 2022 को विशेष सत्र अदालत ने मुफ्ती वलीउल्लाह को एक मामले में फांसी और दूसरे मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
मुफ्ती वलीउल्लाह के खिलाफ दर्ज तीन मामलों में से दो में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जबकि एक मामले में उन्हें बरी कर दिया गया था। फांसी और उम्रकैद की दोनों सजाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई है। निचली अदालत के फैसले को अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड राज रघुवंशी के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
अब इस मामले में हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई का चरण शुरू हो चुका है और अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
