इंदौर,। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, संस्थाओं की भूमिका और देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को लगता है कि जिस व्यवस्था को उनकी मदद, सुरक्षा तथा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की रक्षा के लिए बनाया गया है, वही उनके खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस ‘सिस्टम’ से है, जिसकी कई परतें हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि इस व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर छह लोग हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तथा उद्योगपतियों गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का नाम लिया। उन्होंने इन लोगों को व्यवस्था की अलग-अलग परतों से जोड़ते हुए अपनी राजनीतिक आलोचना रखी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छात्रों को डराने-धमकाने और छात्र आंदोलनों के दमन का आरोप लगाया। अमित शाह को उन्होंने व्यवस्था का ‘enforcer’ बताया। वहीं अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी ने संचार माध्यमों की निगरानी और फोन टैपिंग से संबंधित आरोप लगाए। ये आरोप राहुल गांधी के संबोधन का हिस्सा थे और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किए जा सकते।
राहुल गांधी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए कहा कि वे इस व्यवस्था की वैचारिक परत को देखते हैं। उन्होंने अडानी और अंबानी का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि आर्थिक ताकत का प्रभाव संस्थानों तक पहुंच गया है।
‘छात्र सवाल पूछता है, इसलिए सिस्टम को उससे खतरा’
राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था को छात्रों से इसलिए खतरा महसूस होता है क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र यह सवाल पूछता है कि अमित शाह के बेटे जय शाह क्रिकेट प्रशासन में महत्वपूर्ण पद तक कैसे पहुंचे, दो बड़े उद्योग समूहों का देश के कारोबार पर कितना प्रभाव है और न्यायपालिका, दूसरी संस्थाएं तथा चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छात्र जिज्ञासु होता है और सवाल पूछता है, जबकि उनके शब्दों में व्यवस्था ‘अंधभक्त’ चाहती है। राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जो उनके अनुसार सवाल नहीं पूछते।
शिक्षा, पेपर लीक और रोजगार का मुद्दा भी उठाया
कांग्रेस नेता ने स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति, कमजोर होते इंफ्रास्ट्रक्चर, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी शिक्षा, नर्सिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम में छात्रों ने परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित अपनी परेशानियां राहुल गांधी के सामने रखीं।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में छात्रों को देश की नींव बताते हुए शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को गंभीरता से उठाने की बात कही। ‘छात्रों की गूंज’ का यह इंदौर संस्करण इस श्रृंखला का पांचवां कार्यक्रम था; इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
