रिपोर्ट। शोज़ब मुनीर
अलीगढ़ में जश्न-ए-गौसुलवरा की रूहपरवर महफिलों से फिजा अकीदत और मोहब्बत से सराबोर नजर आई। जिले की विभिन्न खानकाहों, दरगाहों और मदरसों में सय्यदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी उर्फ गौस पाक की याद में विशेष महफिलों का आयोजन किया गया। इनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी अकीदत का इजहार किया। जहरा बाग स्थित मदरसा फैजान मुस्तफा में भी जश्न-ए-गौसुलवरा की अजीमुश्शान महफिल आयोजित हुई। महफिल में बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। इस दौरान जिक्र व तजकिरा, दीनी तालीमात और औलिया-ए-कराम की बेशकीमती खिदमात पर रोशनी डाली गई। पूरी महफिल के दौरान सय्यदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी की मोहब्बत और अकीदत का माहौल कायम रहा।
सर सैयद नगर स्थित खानकाह नियाजिया में अलनियाज एजुकेशनल एंड वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में अजीमुश्शान जश्न-ए-गौसुलवरा का आयोजन किया गया। इस मौके पर खिताब करते हुए पीर-ए-तरीकत डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि गौस पाक की मुबारक जिंदगी का सबसे नुमायां पहलू शरीअत-ए-मुतहरा से बेमिसाल वाबस्तगी और उसकी मुकम्मल पासदारी है। उन्होंने कहा कि आपने दीन की तजदीद व अहया के लिए शरीअत को हमेशा मुकद्दम रखा और लोगों को दीन की हकीकी तालीमात की तरफ मुतवज्जह किया। आपने समाज में फैलने वाली बिदअतों और खुराफात के खिलाफ भरपूर जद्दोजहद की और शरीअत के खिलाफ रसूम की जड़ें काटने के साथ लोगों को दीन पर मजबूती और इखलास के साथ अमल करने की तरगीब दी।
उन्होंने कहा कि हजरत अब्दुल कादिर जिलानी की मुबारक जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा दर्स व तदरीस, वाज व नसीहत और इस्लाह-ए-उम्मत में गुजरा। आपने अपने इल्म, अमल, तकवा और रूहानी फैज के जरिए बेशुमार लोगों के दिलों को ईमान की रोशनी से मुनव्वर किया। आपने दीन-ए-मतीन की हकानियत को लोगों के दिलों में रासिख किया, बदअकीदगी की तारीकी को दूर किया और कुरआन व सुन्नत की बालादस्ती कायम करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी वक्फ कर दी।
उन्होंने कहा कि गौस पाक की शान व अजमत का अहाता अल्फाज में मुमकिन नहीं है। आपकी बेशुमार शानें हैं और आपके कमालात का शुमार किया जाए तो इंसानी जिंदगी खत्म हो सकती है, लेकिन आपकी अजमत व कमालात का बयान मुकम्मल नहीं हो सकेगा। आपकी तालीमात आज भी इंसानियत के लिए मशअल-ए-राह हैं और आपकी मुबारक जिंदगी इखलास, तकवा, शरीअत की पाबंदी और खिदमत-ए-दीन का रोशन नमूना है।
उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि हम सिर्फ महफिलें मुनअकिद कर अकीदत का इजहार करने तक सीमित न रहें, बल्कि गौस पाक की तालीमात को अपनी जिंदगी में नाफिज करें। कुरआन व सुन्नत से अपनी वाबस्तगी मजबूत करें, शरीअत की पाबंदी इख्तियार करें और अपने किरदार व अमल से दीन की हकीकी तरजुमानी करें। यही औलिया-ए-कराम से सच्ची मोहब्बत और अकीदत का तकाजा है। इस मौके पर झंडा-कुशाई की रस्म भी अदा की गई।
इस सिलसिले में डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने बताया कि कर्बला शरीफ, इराक में आयोजित आलमी कांफ्रेंस में मदऊ किए जाने पर यह झंडा उन्हें गौस-ए-आजम की दरगाह की तरफ से अता किया गया था। इस मौके पर कसीदा-ए-गौसिया पढ़ा गया। गौस पाक की शान में मनकबतख्वानी की गई और बारगाह-ए-गौसुलवरा में मंजूम खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। इसके बाद फातिहाख्वानी का एहतिमाम किया गया और अमन व अमान के लिए दुआ की गई।
इस मौके पर हैदर अली नियाजी, हाफिज फरहान नियाजी, सफदर नियाजी, जाफर नियाजी, हैदर अब्बास नियाजी, रूहान नियाजी, अली जमन नियाजी, अली हसनैन नियाजी, इबाद नियाजी, फखरी अली नियाजी, सरवर अजीम नियाजी, करीम नियाजी, खुसरो नियाजी, सरवर अजीम नियाजी, सईद अहमद नियाजी, अदनान नियाजी, आसिफ नियाजी, आतिफ नियाजी, मुजम्मिल नियाजी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
वहीं, जहरा बाग स्थित मदरसा फैजान मुस्तफा में आयोजित जश्न-ए-गौसुलवरा से खिताब करते हुए अल्लामा सय्यद जमाल अहमद ने कहा कि आसमान-ए-विलायत के नूर-ए-ताबां, कुतुब-ए-आलम, महबूब-ए-औलिया और अजीम-उल-मर्तबत शख्सियत सय्यदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह वह जलीलुल कद्र बुजुर्ग हैं, जिन्हें अल्लाह तआला ने मुहीउद्दीन के लकब से सरफराज फरमाया। आपकी पूरी जिंदगी दीन-ए-हक की सरबुलंदी, शरीअत की पासदारी, कुरआन व सुन्नत की तालीमात की तरवीज और इंसानों को सिरात-ए-मुस्तकीम की तरफ बुलाने में गुजरी।
उन्होंने कहा कि पहली रमजानुल मुबारक को सय्यदना गौस पाक बगदाद शरीफ के करीब कस्बा जिलान में पैदा हुए। नसब के एतबार से आपका मकाम बेहद बुलंद था। आप वालिद-ए-गरामी की तरफ से इमाम हसन मुजतबा की ग्यारहवीं और वालिदा-ए-माजिदा की तरफ से इमाम हुसैन की बारहवीं नस्ल से थे। आपका खानदान सालेहीन और नेक बंदगान-ए-खुदा का घराना था और लोग आपके खानदान को अशराफ का खानदान कहा करते थे।

वहीं एन्क्लेव कॉलोनी, हजरत निजामुद्दीन कॉलोनी, निशात बाग, मदरसा फैजान बदरुल हिंद, मदरसा मदीना-तुल-इस्लाम, रजा नगर, मदरसतुल मदीना, मदरसा अरबिया अजहरुल उलूम, मदरसा कादरिया बरकातिया, मदरसा दार-ए-अरकम, मदरसा फैजान गरीब नवाज, मदरसा मुहम्मद अली, मदरसा लुत्फिया, मदरसा फैजान मौला अली समेत विभिन्न खानकाहों और मदरसों में भी जश्न गौसुलवरा की महफिल का आयोजन किया गया।
