संवाद – अज़मत अली
बाराबंकी में स्थानीय कव्वालों ने बांधा समां, ‘छाप तिलक’, ‘ताजदारे हरम’ और ‘आज रंग है’ जैसे कलामों पर झूमे संगीतप्रेमी
बाराबंकी । देवा मेला-2026 की सांस्कृतिक संध्या गुरुवार को सूफियाना संगीत के नाम रही। स्थानीय कव्वालों ने अपनी बुलंद आवाज, दिलकश अंदाज और रूहानी कलामों से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल तालियों और वाहवाही से गूंज उठा। एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को सूफी संगीत की दुनिया में सराबोर कर दिया।
‘दमादम मस्त कलंदर’ से हुआ महफिल का आगाज
कार्यक्रम में कव्वाल साहब वारसी देवा ने अपने लोकप्रिय सूफियाना कलाम ‘दमादम मस्त कलंदर’ से महफिल की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘छाप तिलक सब छीनी’ सहित आशिकाना गजलों और अन्य लोकप्रिय कलामों की प्रस्तुति दी। उनकी गायकी और सूफियाना अंदाज पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
अजीज वारसी और अफ्फान हुसैन वारसी की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
इसी क्रम में कव्वाल अजीज वारसी की टीम ने ‘दमादम मस्त कलंदर’ और ‘सांसों की माला’ जैसे लोकप्रिय कलाम पेश किए। सुर, लय और भावों के सुंदर तालमेल ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
वहीं, कव्वाल अफ्फान हुसैन वारसी और उनकी टीम ने ‘ताजदारे हरम’, ‘बेखुद किए रहते हैं’ तथा ‘आज रंग है’ जैसे मशहूर सूफियाना कलामों की प्रस्तुति दी। उनकी बुलंद आवाज और सधे हुए अंदाज ने महफिल में रूहानियत का रंग भर दिया।
स्थानीय कव्वालों ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की झलक
कार्यक्रम में गुफरान वारसी, कौनेन वारसी सहित अन्य स्थानीय कव्वालों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी गायकी में देवा की सांस्कृतिक विरासत, सूफी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब की झलक देखने को मिली।
देवा मेला-2026 की यह सांस्कृतिक संध्या स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और सूफियाना संगीत की परंपरा को समर्पित रही। देर तक गूंजते कलामों और दर्शकों की दाद ने इस शाम को यादगार बना दिया।
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