आगरा। मुगल सम्राट Shah Jahan की सुपुत्री Jahanara Begum को याद करते हुए इस वर्ष उनके 335वें जश्न-ए-उर्स के मौके पर आगरा में अकीदत के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर की ऐतिहासिक Jama Masjid Agra के निर्माण से जुड़ी उनकी सेवाओं को याद करते हुए लोगों ने फातिहा पढ़ी और लंगर तकसीम किया।
कार्यक्रम का आयोजन इस्लामिया लोकल एजेंसी की ओर से घाटी मामू-भांजा स्थित गरीब नवाज गेस्ट हाउस में किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। एजेंसी के चेयरमैन हाजी असलम कुरैशी ने बताया कि मुगल काल में शहंशाह शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम ने अपने दहेज के लिए जमा की गई रकम से आगरा की शाही जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। उस समय लगभग पांच लाख रुपये की लागत से यह मस्जिद बनवाई गई थी, जो आज भी शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि जहांआरा बेगम का उर्स हर वर्ष रमज़ान के दिनों में मनाया जाता है। इस अवसर पर उनकी याद में फातिहा पढ़ी जाती है, मगफिरत की दुआ की जाती है और लंगर वितरित किया जाता है। कार्यक्रम में लोगों ने जहांआरा बेगम की खिदमत और उनके धार्मिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि जहांआरा बेगम न केवल मुगल परिवार की एक प्रतिष्ठित शख्सियत थीं, बल्कि उन्होंने समाज सेवा और धार्मिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगरा की शाही जामा मस्जिद का निर्माण उनकी दूरदर्शिता और आस्था का प्रतीक है, जो आज भी हजारों नमाजियों के लिए इबादतगाह बनी हुई है।
कार्यक्रम के दौरान माह-ए-रमज़ान के अवसर पर लाल किले के सामने रोज़ा-इफ्तार के आयोजन की भी जानकारी दी गई, जिसमें हर साल बड़ी संख्या में रोज़ेदार शामिल होते हैं।
फातिहा के कार्यक्रम में मुख्य रूप से हाजी बिलाल कुरैशी, मोहम्मद अमजद कुरैशी, नदीम नूर, अनवर पहलवान, नदीम ठेकेदार, सर्वर हुसैन, मोहम्मद फरमान, मोइन कुरैशी समेत कई लोग मौजूद रहे।

