बैठक को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी जनगणना पारखी भार्गव ने बताया कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इस प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न कराया जाएगा।

पहले चरण में मकान गणना की जाएगी, जो मई और जून माह में आयोजित होगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनगणना का मुख्य कार्य किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण पहले ही पूरा हो चुका है और जल्द ही फील्ड ट्रेनरों का प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा।
बैठक के दौरान सभी तहसीलों के लेखपालों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण में बताया गया कि किसी भी गांव के दो मजरों को मिलाकर एक खंड बनाया जा सकता है, लेकिन नगर क्षेत्र में दो वार्डों को मिलाकर एक खंड नहीं बनाया जा सकता।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी क्षेत्र के बीच में सड़क या नदी आती है तो उसे नक्शे में काटा नहीं जाएगा और दोनों हिस्सों को अलग-अलग खंड के रूप में ही दर्शाना होगा। पहले भौतिक रूप से कागज पर नक्शा तैयार किया जाएगा, उसके बाद उसी के अनुरूप कंप्यूटर में डिजिटल नक्शा बनाया जाएगा।
बैठक में जनगणना से जुड़ी अन्य तकनीकी बारीकियों की भी विस्तार से जानकारी दी गई तथा उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
इस अवसर पर सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी ज्योति चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

