आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) में चल रहे 21 दिवसीय ‘AI for All’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम के नवें दिन “एआई टूल्स के प्रयोग” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशू रानी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मनुप्रताप सिंह के निर्देशन में संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, कर्मचारियों और शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आधुनिक उपयोगों से परिचित कराना है।
🎓 विशेषज्ञ व्याख्यान में एआई टूल्स की उपयोगिता पर ज़ोर
कार्यक्रम के नवें दिन विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा काबरा ने “एआई टूल्स के प्रयोग” विषय पर व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक शोध कार्यों में एआई टूल्स की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, जिससे शोध प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, तार्किक और प्रभावी बनती है।
उन्होंने Overleaf, SciSpace, Elicit, Semantic Scholar, Paperpal, Napkin AI और Consensus जैसे प्रमुख टूल्स का विस्तृत परिचय दिया।
🔍 शोध कार्य में एआई की भूमिका
डॉ. काबरा ने बताया कि
- Semantic Scholar शोध-पत्रों की खोज को आसान बनाता है
- Overleaf के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले LaTeX आधारित शोध-पत्र तैयार किए जा सकते हैं
- Paperpal भाषा सुधार और रेफरेंसिंग में मदद करता है
- Napkin AI आकर्षक ग्राफिक्स और विज़ुअल प्रस्तुति तैयार करने में सहायक है
- Consensus साक्ष्य-आधारित निष्कर्ष प्रदान करता है
- SciSpace एक “ऑल-इन-वन” प्लेटफॉर्म के रूप में शोध समझने और विश्लेषण में उपयोगी है
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई टूल्स का नैतिक और संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है तथा यह केवल सहायक साधन हैं, न कि शोध का विकल्प।
🎤 सफल संचालन व सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पी लवानिया ने किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रतिभा रश्मि द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने एआई के उपयोग, उसके अनुप्रयोग और नैतिक सीमाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा संतोषजनक उत्तर दिया गया।
👉 समग्र रूप से यह सत्र आधुनिक शोध पद्धति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने वाला और प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ।

