648 अस्पताल पैनल से बाहर, 61 निलंबित; 140 अस्पतालों पर 8.53 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
लखनऊ। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता बरतने वाले अस्पतालों पर प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। पिछले छह वर्षों में 866 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 648 अस्पतालों को योजना की पैनल सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि 61 अस्पतालों को निलंबित किया गया है। विशेषज्ञ श्रेणी के 17 अस्पताल भी पैनल से बाहर किए गए हैं।
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के मुताबिक, मरीजों के इलाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों का पालन न करने और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
2026 में 318 अस्पतालों पर कार्रवाई
वर्ष 2026 में अब तक 318 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 242 अस्पतालों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 35 मानकों को पूरा नहीं करने पर पैनल से बाहर किया गया। वहीं 61 अस्पतालों को योजना से निलंबित किया गया। इनमें सुपर स्पेशियलिटी के 15 अस्पताल भी शामिल हैं।
इससे पहले वर्ष 2025 में 16 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई थी। इनमें 14 अस्पतालों का डी-इम्पैनलमेंट और दो अस्पतालों की स्पेशियलिटी का डी-इम्पैनलमेंट किया गया।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 27, वर्ष 2023 में 203, वर्ष 2022 में 41, वर्ष 2021 में 44 और वर्ष 2020 में 77 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई।
140 अस्पतालों पर 8.53 करोड़ से अधिक की पेनाल्टी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 अस्पतालों पर कुल 3,45,66,861 रुपये की पेनाल्टी लगाई गई। इसमें से अब तक 3,19,27,958 रुपये की वसूली की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 80 अस्पतालों पर 5,07,59,491 रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है। इनमें से 1,17,72,883 रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि 3,89,86,608 रुपये की राशि अभी शेष है।
दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर 140 अस्पतालों पर कुल 8,53,26,352 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 4,37,00,841 रुपये की वसूली की जा चुकी है।
डाटा एनालिटिक्स से पकड़ी जा रही अनियमितताएं
स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट डाटा एनालिटिक्स के जरिए आयुष्मान मरीजों के इलाज से जुड़ी अनियमितताओं की पहचान कर रही है। इसमें मरीजों के इलाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों का पालन न करना, एक ही मरीज को बार-बार भर्ती दिखाना, एक ही रिपोर्ट भेजना और ओपीडी मरीज को आईपीडी में भर्ती दिखाने जैसे मामलों की जांच की जा रही है।
जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, पेनाल्टी लगाए जाने के बाद भी यदि अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ निलंबन या अन्य कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
गरीबों को समय पर इलाज दिलाना सरकार का लक्ष्य : ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आयुष्मान योजना में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक गरीब व्यक्ति को समय से बेहतर इलाज उपलब्ध कराना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य है। इसे हर हाल में धरातल पर उतारने के लिए सरकार लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रही है।
— टाइम्स ऑफ ताज
