आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, गेम, वीडियो और सोशल मीडिया के कारण बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहते हैं। लेकिन यह आदत अब उनके स्वास्थ्य, खासकर रीढ़ की हड्डी के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में ही बच्चों में गर्दन दर्द, पीठ दर्द और रीढ़ की हड्डी के टेढ़ेपन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लगातार गलत मुद्रा में बैठने से बच्चों की रीढ़ धीरे-धीरे झुकने लगती है, जिसे नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। कई मामलों में बच्चों को कम उम्र में ही सर्वाइकल दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी जैसी दिक्कतें होने लगी हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य रूप से मानव सिर का वजन लगभग 4 से 5 किलोग्राम होता है, लेकिन जब बच्चा गर्दन को 45 से 60 डिग्री तक झुकाकर मोबाइल देखता है तो रीढ़ की हड्डी पर इसका दबाव कई गुना बढ़ जाता है। लगातार ऐसा होने से रीढ़ की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने लगती है।
बच्चों में दिखने वाले प्रमुख लक्षण
- गर्दन और पीठ में लगातार दर्द
- बैठते समय शरीर का झुकना
- जल्दी थकान महसूस होना
- सिरदर्द और आंखों में जलन
- पढ़ाई में ध्यान कम लगना
- कंधों में जकड़न और अकड़न
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर बच्चों को स्थायी रीढ़ संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार फिजियोथेरेपी या लंबे इलाज की जरूरत भी पड़ती है।
कैसे करें बचाव
- बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें
- मोबाइल की बजाय आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें
- पढ़ाई और मोबाइल इस्तेमाल के दौरान सही मुद्रा में बैठने की आदत डालें
- हर 20 से 30 मिनट में ब्रेक लेने को कहें
- पर्याप्त नींद और संतुलित आहार सुनिश्चित करें
- गर्दन और पीठ के हल्के व्यायाम कराएं
डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे लगातार गर्दन या पीठ दर्द की शिकायत करें, शरीर झुकाकर चलने लगें या बैठने का तरीका बदल जाए तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
डिजिटल सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन बच्चों का स्वस्थ बचपन उससे भी ज्यादा जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की मोबाइल आदतों पर नजर रखें और उन्हें संतुलित दिनचर्या की ओर प्रेरित करें।

