आगरा के दिव्यांगों के जीवन में नई उम्मीद, 295 दिव्यांग अपने पैरों पर खड़े
आगरा । मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है जब उसका अस्तित्व किसी और के जीवन में आशा का दीप जला सके। इसी भाव को साकार करते हुए नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार को त्रिवेणी ग्रीन्स, जे पी होटल के पास, फतेहाबाद रोड, आगरा,उत्तर प्रदेश में विशाल निःशुल्क जापान एवं जर्मन तकनीक से निर्मित 3डी प्रिन्टेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब फिटमेंट कैंप एवं दानदाता अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यह केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि असंख्य टूटे सपनों को जोड़ने और थमी हुई ज़िंदगियों को फिर से गति देने का महायज्ञ था।शिविर में 295 दिव्यांगजनों को 371 नारायण मॉड्यूलर कृत्रिम हाथ-पैर (लिम्ब) एवं कैलिपर्स निःशुल्क लगाए गए। वर्षों से जो पैर चलना भूल चुके थे, वे अब फिर से जीवन की राह पर डग भरने लगे। जिन चेहरों पर निराशा थी, वहां आत्मविश्वास और प्रसन्नता की उजली मुस्कान लौट आई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेणुका जैन ने कहा कि “यह केवल एक चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि मानवता का सच्चा संदेश देने वाला प्रेरक क्षण है। किसी परिवार का एक सदस्य जब फिर से अपने पैरों पर खड़ा होता है, तो पूरा परिवार नए उत्साह से जीने लगता है।”
विशिष्ट अतिथि राधे श्याम गर्ग ने इस सेवा कार्य को धरती पर देवत्व का रूप बताया और कहा कि “जो पैर चलना भूल चुके थे, वे अब फिर से डग भरेंगे। यह दृश्य सचमुच भावविभोर कर देने वाला है।”शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मेवाड़ी परंपरा अनुसार अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ।संस्थान के राजमल शर्मा मुख्य प्रभारी, व सहप्रभारी रमेश शर्मा ने बताया कि 8 मार्च को आयोजित चयन शिविर में 570 से अधिक दिव्यांगजन पंजीकृत हुए थे, जिनमें से 295 लाभार्थी आज नया जीवन पा रहे हैं।उन्होंने कहा कि शिविर में संस्थान की 40 सदस्यीय टीम ने जर्मन तकनीक से निर्मित नारायण लिंब का फिटमेंट किया। डॉक्टरों ने लाभार्थियों को कृत्रिम अंगों के उपयोग और देखरेख का प्रशिक्षण भी दिया। दिव्यांग लाभार्थियों की प्रेरणादायी परेड ने उपस्थित सभी की आंखें नम कर दीं।उल्लेखनीय है कि नारायण सेवा संस्थान वर्ष 1985 से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में कार्यरत है। संस्थापक श्री कैलाश मानव को उनकी अद्वितीय सेवा भावना के लिए राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वहीं संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हुआ है। अब तक संस्थान द्वारा देश-विदेश में 39,591 से अधिक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रदान किए जा चुके हैं तथा 4.52 लाख से अधिक दिव्यांगजनों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है।

