प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे ने भारतीय रेल के इतिहास में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए चिपयाना बुजुर्ग–टूंडला रेलखंड पर अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 (TCAS) का सफलतापूर्वक कमिशनिंग कर दिया है। यह देश का पहला रेलखंड बन गया है जहां 160 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए कवच वर्ज़न 4.0 को पूरी तरह कार्यशील बनाया गया है।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व तथा प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेन्द्र सिंह के तकनीकी मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई है। इस कमिशनिंग के साथ उत्तर मध्य रेलवे में कवच वर्ज़न 4.0 का नेटवर्क बढ़कर 445 रूट किलोमीटर तक पहुंच गया है।
यह परीक्षण कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस में किया गया, जो केर्नेक्स कंपनी द्वारा विकसित कवच प्रणाली से सुसज्जित है। महाप्रबंधक ने इस सफलता को ‘मिशन रफ्तार’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए पूरी तकनीकी टीम को बधाई दी।
तकनीकी उपलब्धियों का नया अध्याय
चिपयाना बुजुर्ग से टूंडला रेलखंड अब भारतीय रेलवे का एकमात्र ऐसा खंड बन गया है जहां 160 किमी प्रति घंटे की गति पर कवच वर्ज़न 4.0 सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। पहली बार कवच प्रणाली को प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स के माध्यम से हिताची इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। साथ ही ईआईपीसी और एलसी टीसीएएस प्रणालियों के जरिए ट्रैक एवं सिग्नलिंग ढांचे का निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित किया गया है।
विशाल बुनियादी ढांचे का निर्माण
इस परियोजना के अंतर्गत 175 रूट किलोमीटर क्षेत्र में 22 स्टेशन टीसीएएस और 9 एलसी टीसीएएस इकाइयां स्थापित की गईं। इसके अलावा 10 WAP-7 इंजनों को कवच प्रणाली से लैस किया गया तथा 4500 से अधिक RFID टैग ट्रैक पर लगाए गए। संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 9 नए 40 मीटर ऊंचे टावर और 48-कोर फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क भी स्थापित किया गया।
कड़े सुरक्षा परीक्षणों में मिली सफलता
प्रणाली को चालू करने से पूर्व अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO), उत्तर मध्य रेलवे की कोर टीम और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता Italcertifier द्वारा व्यापक सुरक्षा परीक्षण किए गए। 10,000 किलोमीटर से अधिक की ‘नो-बीआईयू’ टेस्ट रनिंग सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके साथ ही 180 से अधिक SPAD प्रिवेंशन और लूप लाइन स्पीड कंट्रोल परीक्षणों में भी प्रणाली पूरी तरह सफल रही।
हेड-ऑन तथा रियर-एंड टक्कर रोधी परीक्षणों के अलावा वंदे भारत एक्सप्रेस, शताब्दी और श्रमशक्ति एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनों के साथ व्यापक परीक्षण भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए।
रेल सुरक्षा और गति को मिलेगा नया आयाम
प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेन्द्र कुमार के निर्देशन में मुख्यालय एवं प्रयागराज मंडल की टीम ने दिन-रात मेहनत कर इस परियोजना को साकार किया।
दिल्ली–हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर सुरक्षा और गति दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली यह उपलब्धि भारतीय रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के लिए गर्व का विषय बन गई है।
संवाददाता, टाइम्स ऑफ ताज

