पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक और सामाजिक आंदोलन बनाने का समय
लेखक: इंजीनियर मुहम्मद आदिल
प्रदेश अध्यक्ष, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड
धरती का बढ़ता तापमान, घटते जल स्रोत, प्रदूषित होती हवा और लगातार कटते जंगल आज पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं। मौसम का असंतुलन, असमय वर्षा, भीषण गर्मी और प्राकृतिक आपदाएं हमें यह संदेश दे रही हैं कि यदि हमने अभी भी प्रकृति की ओर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ऐसे दौर में हरियाली बढ़ाना केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानी अस्तित्व का सवाल बन गया है। यह सोचने का विषय है कि आखिर हम अपने बच्चों को कैसी धरती सौंपना चाहते हैं? एक ऐसी धरती जहां सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा भी न मिले, या फिर ऐसी धरती जो पेड़ों की छांव, शुद्ध वातावरण और प्राकृतिक संतुलन से भरपूर हो।
इस्लाम ने सदियों पहले पर्यावरण संरक्षण का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ ने पेड़ लगाने को सदका-ए-जारीया बताया। एक हदीस का भावार्थ है कि यदि कयामत आने वाली हो और किसी के हाथ में पौधा हो तो वह उसे लगा दे। यह शिक्षा बताती है कि वृक्षारोपण केवल सामाजिक कार्य नहीं बल्कि एक इबादत और नेक अमल भी है।
आज जरूरत इस बात की है कि उलेमा-ए-इकराम, इमाम मस्जिद, मदरसा संचालक और धार्मिक संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण को अपने मिशन का हिस्सा बनाएं। जुमे के खुत्बों में पेड़ लगाने की अहमियत पर चर्चा हो, मस्जिदों और मदरसों के परिसरों में पौधारोपण किया जाए तथा हर धार्मिक कार्यक्रम में हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया जाए।
यदि प्रदेश की हर मस्जिद वर्ष में कम से कम 50 पौधे लगाने और उनकी देखभाल का संकल्प ले, तो लाखों पेड़ धरती की गोद में लगाए जा सकते हैं। निकाह, उर्स, जलसे और सामाजिक कार्यक्रमों में उपहार के रूप में पौधे देने की परंपरा शुरू की जाए तो यह एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकता है।
पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति, संगठन या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह हम सभी का साझा दायित्व है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है, तब धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उलेमा-ए-इकराम यदि इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और समाज को प्रेरित करें तो हरियाली बढ़ाने का एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
आइए संकल्प लें कि हम केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी देखभाल भी करेंगे। क्योंकि एक पेड़ केवल छाया नहीं देता, बल्कि जीवन देता है, ऑक्सीजन देता है और आने वाली नस्लों के भविष्य को सुरक्षित करता है।
धरती हमारी अमानत है और इसकी हिफाजत हमारी जिम्मेदारी।

