सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, भर्ती प्रक्रिया तेज करने का दावा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हर वर्ष बजट में बढ़ोतरी कर रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में हजारों पद रिक्त होने के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों के 19,659 स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 6,500 पद खाली पड़े हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार ने लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेज दिया है। साथ ही स्वास्थ्य सेवा भर्ती बोर्ड के गठन की तैयारी भी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में भी स्वीकार किया गया था कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) कैडर में लगभग 6,000 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। सबसे अधिक चिंता विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर है। आंकड़ों के अनुसार सर्जनों के 83.2 प्रतिशत और शिशु रोग विशेषज्ञों के 81.6 प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। नए मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही भर्ती पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य अवसंरचना, मेडिकल कॉलेजों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर खर्च हो रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं होतीं, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार संभव नहीं होगा।
मरीजों की बढ़ रही परेशानी
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। कई अस्पतालों में एक ही डॉक्टर को कई विभागों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
स्वास्थ्य बजट में लगातार वृद्धि के बावजूद डॉक्टरों की कमी का मुद्दा सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी कब तक दूर हो पाती है।
— टाइम्स ऑफ ताज ब्यूरो

