लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लक्ष्य के साथ समाजवादी पार्टी ने अभी से चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के नेतृत्व में सभी 403 विधानसभा सीटों पर जातीय समीकरण, संगठनात्मक फीडबैक, सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय हालात का गहन अध्ययन कराया जा रहा है।
सपा ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार गठबंधन में सीटों का बंटवारा केवल राजनीतिक दावेदारी या पुराने समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि जीत की सबसे अधिक संभावना रखने वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस से उसकी दावेदारी वाली सीटों और संभावित उम्मीदवारों की सूची मांगी गई है।
जीत के लिए नया प्रयोग
सूत्रों के मुताबिक सपा और कांग्रेस के बीच एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें किसी सीट पर कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर सपा समर्थित उम्मीदवार उतारा जा सकता है, जबकि दूसरी सीट पर सपा के टिकट पर कांग्रेस पृष्ठभूमि का नेता चुनाव लड़ सकता है। उद्देश्य केवल एक है—भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारना।
लोकसभा की सफलता से बढ़ा उत्साह
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के शानदार प्रदर्शन ने विपक्षी खेमे का मनोबल बढ़ाया है। सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा को बड़ा झटका दिया था। हालांकि पार्टी नेतृत्व मानता है कि विधानसभा चुनाव का गणित अलग होता है, इसलिए इस बार कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा।
हर सीट की हो रही माइक्रो मैपिंग
सपा की टीम पिछले चुनावों के परिणाम, हार-जीत का अंतर, बूथवार वोटिंग पैटर्न, जातीय समीकरण और स्थानीय नेताओं की लोकप्रियता का विश्लेषण कर रही है। कई सीटों पर सर्वे और फीडबैक का काम लगभग पूरा हो चुका है। पार्टी का दावा है कि टिकट वितरण पूरी तरह जीत की क्षमता के आधार पर होगा।
राहुल गांधी से भी हुई चर्चा
बताया जा रहा है कि हाल ही में नई दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi से सीट बंटवारे को लेकर उदार रुख अपनाने और बेहतर समन्वय बनाए रखने की बात कही। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस फार्मूले पर सकारात्मक सहमति बनती दिख रही है।
भाजपा के सामने बड़ी चुनौती?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सपा और कांग्रेस ‘जिताऊ उम्मीदवार’ के फॉर्मूले को सफलतापूर्वक लागू कर लेते हैं, तो 2027 का चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला हो सकता है। फिलहाल सपा का पूरा फोकस एक-एक सीट पर जीत का गणित साधने और विपक्षी वोटों को एकजुट करने पर है।
“दावे नहीं, जीत तय करेगी टिकट” — इसी मंत्र के साथ सपा ने 2027 के महासंग्राम की तैयारी शुरू कर दी है।

