आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों के पीछे वाहनों की तेज रफ्तार एक प्रमुख कारण बनी हुई है। निर्धारित 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा के बावजूद बड़ी संख्या में चालक 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से वाहन दौड़ा रहे हैं। यातायात पुलिस ने अप्रैल से जून 2026 के बीच 100 किमी प्रति घंटे से अधिक गति से चलने वाली 41 हजार से अधिक कारों के चालान किए हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कारों की अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। सामान्य दिनों में यमुना एक्सप्रेसवे से प्रतिदिन 14 से 16 हजार तथा लखनऊ एक्सप्रेसवे से 12 से 14 हजार वाहन गुजरते हैं।
वाहनों की गति पर निगरानी रखने के लिए दोनों एक्सप्रेसवे पर स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, कई चालक स्पीड मीटर के पास पहुंचते ही वाहन की गति कम कर नियमों से बचने की कोशिश करते हैं।
ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए यातायात पुलिस ने अप्रैल से इंटरसेप्टर वाहन तैनात किए हैं। आगरा सीमा के विभिन्न हिस्सों में रोटेशन के आधार पर प्रतिदिन इंटरसेप्टर लगाए जाते हैं, जो तेज रफ्तार वाहनों की पहचान कर तत्काल चालान की कार्रवाई करते हैं।
हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे पर 157 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही एक रेंज रोवर कार को इंटरसेप्टर ने पकड़ा और उसका चालान किया। इसी दौरान 145 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही एक अन्य कार तथा 144 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही एमजी हेक्टर के विरुद्ध भी दो-दो हजार रुपये का चालान किया गया।
यातायात पुलिस के अनुसार, दोनों एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से वाहनों की यात्रा का समय भी रिकॉर्ड किया जाता है। यदि कोई वाहन निर्धारित दूरी को तय समय से कम में पूरा करता है तो उसके विरुद्ध स्वतः चालान की कार्रवाई की जाती है।
हालांकि, कुछ वाहन चालक इस व्यवस्था से बचने के लिए एक्सप्रेसवे पर स्थित ढाबों या विश्राम स्थलों पर आधे से एक घंटे तक रुक जाते हैं, जिससे उनकी कुल यात्रा अवधि बढ़ जाती है। इसके बावजूद पुलिस इंटरसेप्टर और अन्य तकनीकी माध्यमों से तेज रफ्तार वाहनों पर लगातार निगरानी रख रही है तथा सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान जारी है।

