48 कार्यदिवस तक चलेगा प्रशिक्षण, फरवरी 2027 तक पूरा होगा अभियान; हर विद्यालय में बनेगा सेल्फ डिफेंस क्लब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान’ शुरू करने का निर्णय लिया है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के 45,721 उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं को 48 कार्यदिवस का विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
समग्र शिक्षा की राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यह अभियान फरवरी 2027 तक हर हाल में पूरा कराया जाए। प्रशिक्षण का संचालन विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशक, व्यायाम शिक्षक, शिक्षिकाएं तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के खेल शिक्षक करेंगे।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को केवल आत्मरक्षा की तकनीकें ही नहीं, बल्कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की जानकारी, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग, वार्मअप, मॉक ड्रिल, ब्लॉक एवं बचाव की तकनीक, शरीर के संवेदनशील अंगों की पहचान, जेंडर सशक्तीकरण और आत्मरक्षा किट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भी जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षकों द्वारा यह भी समझाया जाएगा कि आत्मरक्षा कौशल का प्रयोग केवल आवश्यकता और आपात परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक विद्यालय में ‘सेल्फ डिफेंस क्लब’ का गठन किया जाएगा। इसमें 10 प्रशिक्षित छात्राओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो अन्य बालिकाओं को नियमित अभ्यास कराकर आत्मरक्षा कौशल को आगे बढ़ाएंगी।
प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए वीरांगना पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो का उपयोग किया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षण की उपस्थिति, फोटो और वीडियो भी इसी पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, जिससे पूरे अभियान की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह अभियान केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बालिकाओं में साहस, आत्मविश्वास, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का हौसला भी विकसित करेगा। इससे छात्राएं स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करेंगी और विद्यालयों में आत्मरक्षा की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

