आगरा। मिढ़ाकुर स्थित खानकाह सद्भावना आश्रम में हज़रत शेख़ मुहम्मद शफ़ीक़ लाल शाह क़ादरी मदारवी की दस रोज़ा फ़ातिहा का अकीदत व एहतराम के साथ आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुरीदीन, उलेमा, सूफ़िया, समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों ने हाज़िरी देकर ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया तथा मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए ख़ुसूसी दुआएँ की गईं।
कार्यक्रम में पीर ज़ादा शैख़ मोहम्मद आमिर क़ादरी अशरफ़ी न्याज़ी शफ़ीक़ी, पीर ज़ादा शैख़ मोहम्मद सलमान क़ादरी अशरफ़ी शफ़ीक़ी, सूफ़ी शाकिर क़ादरी अशरफ़ी शफ़ीक़ी, मौलाना दिलकश जालौनवी, सय्यद गुलज़ार साहब, मौलाना जहाँगीर अशरफ़ी, मौलाना अर्श, मजीद ख़ान शफ़ीक़ी, कमल साहित्य, मोहम्मद इमरान, बूंदु ख़ान, सय्यद मोहम्मद सलीम, सय्यद मोहम्मद यूसुफ, जलाउद्दीन शफ़ीक़ी, मस्तान मुबारकी, शकील उद्दीन अशरफ़ी, सानू मदारी, जाबिर शफ़ीक़ी, शकील कुरैशी, बशीर उस्मानी, आरिफ़ ख़ान, उस्मान अंसारी, क़दीर शफ़ीक़ी, नईम उद्दीन तथा ठाकुर पुष्पा देवी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उलेमा-ए-किराम ने अपने संबोधन में हज़रत शेख़ मुहम्मद शफ़ीक़ लाल शाह क़ादरी मदारवी की तालीमात, इंसानियत, मोहब्बत, सूफ़ी परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द के संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि औलिया-ए-किराम की ज़िंदगी इंसानियत की ख़िदमत, प्रेम और भाईचारे का बेहतरीन नमूना है। उन्होंने लोगों से उनके बताए रास्ते पर चलने और समाज में एकता व सद्भाव को मज़बूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में फ़ातिहा, कुरआनख़्वानी और सामूहिक दुआ का आयोजन हुआ, जिसके बाद सभी अकीदतमंदों में लंगर/तबर्रुक वितरित किया गया।

