मुंगेर/भागलपुर। मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर उर्दू विभाग के सेमेस्टर-4 (2024-26) के छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित विदाई समारोह के अवसर पर “नारी शिक्षा और उर्दू” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने महिला शिक्षा, उर्दू भाषा के महत्व तथा नई पीढ़ी की शैक्षणिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। पूरे आयोजन के दौरान शैक्षणिक और साहित्यिक वातावरण बना रहा तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शाहिद रज़ा जमाल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि विदाई किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को समाज में परिवर्तन का माध्यम बनाने का आह्वान करते हुए कहा, “अंधेरे को कोसने से बेहतर है कि एक दीप जलाया जाए।”
मुख्य अतिथि एवं जे.आर.एस. कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. इकबाल हसन आज़ाद ने कहा कि डिग्री हासिल करना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से समाज और राष्ट्र की सेवा करना ही वास्तविक सफलता है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश चंद्र शाही, इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश चंद्र पांडे, डॉ. शाहिद अख्तर अंसारी, डॉ. सबीहा नसरीन, डॉ. अजय कुमार तथा डॉ. अंशु राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने महिला शिक्षा की आवश्यकता, उर्दू भाषा एवं साहित्य की समृद्ध विरासत और युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारियों पर जोर दिया।
संगोष्ठी के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए। वक्तृत्व प्रतियोगिता में ज़ाहिदा नवाज़ ने प्रथम, शमा परवीन ने द्वितीय तथा वाहिदा नवाज़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन को सफल बनाने में आसिफ अली, जिमी, शहाबुद्दीन, अबू बकर, शगुफ्ता, तस्लीम कौसर, इनामुल, बाबर, फरहीन, अर्शी रोजी, नायाब और तरन्नुम सहित अनेक विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विदाई समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ और सभी ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

