रामपुर। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए शनिवार को सपा के 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पहले छात्र-छात्राओं से मुलाकात की, फिर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद इकरा हसन, रुचि वीरा, जियाउर्रहमान बर्क, मोहिब्बुल्लाह, नीरज मौर्य, रामजीलाल सुमन, राजीव राय, बीरेंद्र सिंह मलिक, रामशिरोमणि वर्मा, जावेद अली खान सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। पूर्व सांसद एवं महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
सांसदों ने सबसे पहले जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं से मुलाकात की और उनका समर्थन किया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया।
मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है और इसे किसी भी कीमत पर गिरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन उनकी मांग नहीं मानता है तो वे उच्च अधिकारियों से लेकर न्यायालय तक जाएंगे।
वहीं संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने ध्वस्तीकरण के आदेश को गलत बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन चलने पर वह जीरो ऑवर में इस विषय को प्रमुखता से रखेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
सपा प्रतिनिधिमंडल के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। जौहर विश्वविद्यालय और कलेक्ट्रेट परिसर में तीन-तीन थानों की पुलिस, एक-एक क्षेत्राधिकारी (सीओ), वज्र वाहन तथा फायर ब्रिगेड की तैनाती की गई।
इससे पहले गुरुवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में 25 विधायकों और अन्य नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचा था। उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात करने के बाद विश्वविद्यालय का दौरा किया और आजम खान की पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा से भी भेंट की थी।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई 2026 को मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई से पहले 15 दिन का समय दिया गया है।
इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय की चेयरमैन एवं ट्रस्टी निखत अफलाक खान ने मुरादाबाद मंडल के आयुक्त की अदालत में अपील दायर की है, जिस पर 28 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है।
सपा का कहना है कि विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाना शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और हजारों छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई भवन निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन के आधार पर की जा रही है।

