लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी संगठन विस्तार, क्षेत्रीय सम्मेलनों और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के साथ-साथ गठबंधन में अपनी दावेदारी भी मजबूत करने में जुटी है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रालोद ने भाजपा के समक्ष 36 विधानसभा सीटों का प्रस्ताव रखा है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी की ओर से जिन सीटों पर दावा किया गया है, उनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई ऐसी सीटें शामिल हैं, जहां रालोद खुद को मजबूत स्थिति में मानता है। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा-रालोद गठबंधन बरकरार रहता है, तो रालोद को करीब 20 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, पूर्वांचल क्षेत्र में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा का रुख अपेक्षाकृत सतर्क रहने की संभावना जताई जा रही है।
रालोद नेताओं का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने समाजवादी पार्टी से 50 सीटों की मांग की थी, जबकि समझौता 33 सीटों पर हुआ था। पार्टी का दावा है कि पिछले चुनावों और उसके बाद हुए उपचुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसका जनाधार मजबूत हुआ है।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद पार्टी के टिकट पर बागपत और बिजनौर से उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री बने।
पार्टी अब खुद को केवल जाट और किसान समुदाय तक सीमित रखने के बजाय सर्वसमाज की पार्टी के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से पश्चिमी, मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र में लगातार सम्मेलन और जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक रालोद की नजर मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, अलीगढ़, बिजनौर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर जनपदों की कई विधानसभा सीटों पर है। साथ ही पार्टी कुछ सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को भी मौका देकर अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
हालांकि, विधानसभा चुनाव में सीटों के अंतिम बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर गठबंधन दलों की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

