नई दिल्ली। विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन का विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में पेश कर सकती है। संसदीय सूत्रों के अनुसार यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि हाल के महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के बाद सरकार अब अन्य लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी क्रम में एफसीआरए संशोधन विधेयक भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत केंद्र सरकार को विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले एनजीओ की निगरानी के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण गठित करने का अधिकार मिल सकता है। यह प्राधिकरण एनजीओ की गतिविधियों की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाए, जिसके लिए वह स्वीकृत किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विदेशी अंशदान के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। वहीं, इस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि सरकार को विश्वास है कि वह विधेयक को संसद से पारित कराने में सफल रहेगी।
गौरतलब है कि अतीत में कुछ एनजीओ पर विदेशी सहायता के दुरुपयोग से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। हालांकि ऐसे मामलों में आरोपों की स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

