जुल्सा-ए-अजमत-ए-औलिया में देशभर के उलेमा-मशायख होंगे शामिल, खानकाह-ए-शफीकी में उमड़ेगा अकीदतमंदों का हुजूम
आगरा। सूफी परंपरा और रूहानी विरासत से जुड़े पीरे तरीकत रहबर-ए-राहे शरीअत हज़रत शेख़ मुहम्मद शफीक उद्दीन अल मारूफ़ बाबा लाल शाह क़ादरी चिश्ती, मदारी, अशरफ़ी एवं अबुल उलाई रहमतुल्लाह अलैह के उर्स-ए-चहल्लुम के मौके पर आगरा में रूहानी और इल्मी महफिल सजेगी।

12 अगस्त 2026, बुधवार को बाद नमाज़-ए-जुहर फतेहपुर सीकरी रोड स्थित खानकाह-ए-शफीकी, मिढ़ाकुर, आगरा में जुल्सा-ए-अजमत-ए-औलिया का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर अकीदतमंदों में खासा उत्साह है और तैयारियां की जा रही हैं।
देश के कई हिस्सों से पहुंचेंगे उलेमा और मशायख
जुल्सा-ए-अजमत-ए-औलिया में देश के विभिन्न हिस्सों से उलेमा-ए-कराम, मशायख और धार्मिक विद्वान शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में छतरपुर, झांसी, रामपुर, रायपुर, जयपुर, राज बीकानेर, अकबराबाद समेत विभिन्न स्थानों से आने वाले उलेमा एवं मशायख अपनी तकरीरों के जरिए अकीदतमंदों को बुजुर्गाने दीन की तालीमात और रूहानी पैगाम से रूबरू कराएंगे।
कार्यक्रम में जायरे सदर, जायरे सरपरस्ती, मुक़र्रिरीन-ए-खुसूसी, खतीबे जीशान, मुक़र्रिरे जीशान, मेहमाने खुसूसी और जायरे गुलपोशी सहित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने वाले उलेमा व मशायख मौजूद रहेंगे।
उर्स-ए-चहल्लुम बनेगा अकीदत का केंद्र
उर्स के मौके पर बड़ी संख्या में मुरीदीन, अकीदतमंद और जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है। जुल्सा-ए-अजमत-ए-औलिया में धार्मिक तकरीरें, नात-ओ-मनकबत और बुजुर्गाने दीन की शिक्षाओं पर रोशनी डाली जाएगी।
आयोजकों ने अकीदतमंदों से अपील की है कि वे 12 अगस्त को खानकाह-ए-शफीकी पहुंचकर उर्स-ए-चहल्लुम और जुल्सा-ए-अजमत-ए-औलिया में शिरकत करें तथा बुजुर्गाने दीन की तालीमात से फैज़ हासिल करें।
जाय-ए-इंतजाम: पीरजादा शेख़ मोहम्मद सलमान क़ादरी शफीकी अशरफ़ी एवं ख़ादिम-ए-ख़ास सूफी शाहिद क़ादरी शफीकी अशरफ़ी (काबुल भाई) की देखरेख में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

