तनाव, दबाव और अवसाद से जूझ रहे छात्रों को मिलेगी गोपनीय काउंसलिंग; इंजीनियरिंग कॉलेजों में तैनात होंगे मनोवैज्ञानिक और काउंसलर
लखनऊ। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद उठे सवालों के बीच राज्य सरकार ने मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए समर्पित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।
इन केंद्रों का उद्देश्य पढ़ाई के दबाव, परीक्षा का तनाव, व्यक्तिगत समस्याओं, चिंता और अवसाद जैसी परेशानियों से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय रहते मदद उपलब्ध कराना होगा।
🧠 सिर्फ छात्रों के लिए होंगे ये केंद्र
राज्य के कई राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पहले से मनोचिकित्सा विभाग मौजूद हैं, लेकिन प्रस्तावित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र उनसे अलग होंगे।
इन केंद्रों को विशेष रूप से छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों को यहां उनकी समस्याओं के संबंध में गोपनीय परामर्श और काउंसलिंग मिलेगी। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
🎓 इंजीनियरिंग कॉलेजों में काउंसलर की तैनाती
इंजीनियरिंग कॉलेजों में मनोवैज्ञानिक और प्रशिक्षित काउंसलर तैनात किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी अकादमिक दबाव या निजी परेशानियों से जूझते हुए समस्या गंभीर होने का इंतजार न करें, बल्कि समय रहते विशेषज्ञ से बात कर सकें।
🔒 गोपनीयता पर रहेगा खास जोर
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रस्तावित केंद्रों में विद्यार्थियों को ऐसा सुरक्षित माहौल देने पर जोर होगा, जहां वे बिना झिझक अपनी परेशानी साझा कर सकें।
सरकार की यह पहल इस सोच पर आधारित है कि छात्रों की सफलता सिर्फ अच्छे अंक और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है।
📚 पढ़ाई का दबाव हो या जिंदगी की परेशानी… अब छात्रों को मिलेगा अपना ‘सहारा’
उत्तर प्रदेश में यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता अपने ही संस्थान में मिल सकेगी।
छात्रों के लिए संदेश साफ है—परेशानी छिपाने की जरूरत नहीं, समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है।
