ISRO की तस्वीरों से सामने आई भयानक सच्चाई, ग्लेशियर टूटने के बाद भोटेकोशी नदी ने लिया विकराल रूप
देहरादून। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के पीछे की वजह अब सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए सामने आ गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की ओर से जारी तस्वीरों के विश्लेषण में लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने और उसके बाद हुए हिम-पत्थर के मलबे के बहाव को इस विनाशकारी घटना से जोड़कर देखा गया है।
जानकारी के मुताबिक करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा टूटकर नीचे आया। इसके बाद भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर बढ़ा और भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए।
🛰️ Satellite तस्वीरों ने खोला राज
NRSC के विश्लेषण में अलग-अलग तारीखों की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना की गई। 24 अगस्त की Sentinel-2 तस्वीर में संबंधित क्षेत्र सामान्य रूप से ग्लेशियर के रूप में दिखाई देता है।
इसके बाद 26 अगस्त की Landsat-9 तस्वीर में उसी इलाके में बड़े पैमाने पर बदलाव नजर आया। तस्वीरों में ग्लेशियर के टूटने के बाद बने बर्फ और चट्टानों के मलबे वाले क्षेत्र को स्पष्ट रूप से देखा गया।
यानी दो दिनों के अंतर में इलाके की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
⚠️ बर्फ और चट्टानों का मलबा बना तबाही की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इसके नदी तक पहुंचने के बाद भोटेकोशी का बहाव अचानक खतरनाक हो गया।
बाढ़ की तेज धार अपने रास्ते में आने वाली संरचनाओं और अन्य चीजों को नुकसान पहुंचाती हुई आगे बढ़ी।
🌍 हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरे की चेतावनी
यह घटना एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को सामने लाती है। ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर टूटने या झीलों के अचानक फटने जैसी घटनाएं निचले क्षेत्रों में बेहद कम समय में विनाशकारी बाढ़ का रूप ले सकती हैं।
सैटेलाइट तकनीक ऐसी घटनाओं के कारणों को समझने के साथ-साथ भविष्य में संवेदनशील इलाकों की निगरानी और आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
🚨 ग्लेशियर टूटा… नदी उफनी और मच गई तबाही!
नेपाल की इस घटना ने एक बार फिर बता दिया है कि हिमालय की ऊंची चोटियों पर होने वाला बदलाव कुछ ही घंटों में नीचे बसे इलाकों के लिए बड़ी आपदा का रूप ले सकता है।
