अखिलेश बोले- सकारात्मकता से सद्भाव, सद्भाव से सामाजिक एकता; ‘पीड़ित पंडित’ वाला दांव भी चर्चा में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ समाजवादी पार्टी ने अपना PDA कार्ड फिर से सामने कर दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को PDA की नई व्याख्या करते हुए इसे Patience, Discipline and Action यानी धैर्य, अनुशासन और कार्रवाई बताया। अखिलेश के इस नए संदेश को चुनावी राजनीति में PDA के दायरे को व्यापक बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ग्राफिक साझा करते हुए कहा कि धैर्य, अनुशासन और कार्रवाई सफलता की तीन कुंजियां हैं। उन्होंने कहा कि PDA की सकारात्मक राजनीति का परिणाम यह है कि लोग खुद PDA को अलग-अलग सकारात्मक रूपों में परिभाषित कर रहे हैं।
PDA से सामाजिक एकता तक का संदेश
अखिलेश ने अपने संदेश में कहा कि सकारात्मकता से सद्भाव पैदा होता है और सद्भाव से सामाजिक एकता मजबूत होती है। सामाजिक एकता देश को प्यार, करुणा और अपनत्व के भाव से जोड़ती है और प्रगति एवं समृद्धि का नया रास्ता खोलती है।
राजनीतिक रूप से देखें तो समाजवादी पार्टी के लिए PDA लंबे समय से उसकी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को पार्टी अपने प्रमुख सामाजिक आधार के रूप में पेश करती रही है।
‘पीड़ित पंडित’ से सवर्ण वोटरों तक संदेश?
अखिलेश यादव की हालिया राजनीति में PDA को लेकर एक और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। सपा प्रमुख ने ऊंची जातियों, खासकर ब्राह्मण मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश के संकेत देते हुए PDA की व्याख्या ‘पीड़ित पंडित’ के रूप में भी की थी।
5 अगस्त को जनेश्वर मिश्र की जयंती पर अखिलेश ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव में PDA से हार के बाद BJP अलग-अलग तरह से PDA की परिभाषा बता रही है। उन्होंने कहा था कि BJP जितना दर्द बढ़ाएगी, PDA उतना ही मजबूत होगा।
2024 की जीत को 2027 में दोहराने की चुनौती
समाजवादी पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को 2027 के विधानसभा चुनाव में दोहराने की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 255 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि सपा को 111 सीटें मिली थीं।
लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर बदली और उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में सपा ने 37 सीटें जीतकर BJP से चार सीट ज्यादा हासिल कीं।
अब अखिलेश यादव के सामने सवाल यही है कि क्या PDA का सामाजिक समीकरण, ‘पीड़ित पंडित’ का संदेश और ‘धैर्य-अनुशासन-एक्शन’ का नया फॉर्मूला 2027 में सपा को सत्ता की दहलीज तक पहुंचा पाएगा?
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में आने वाले महीनों में PDA की यह नई परिभाषा कितना असर डालती है, इस पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर रहेगी।
